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<title>سازمان جهانی یگانگی انسان</title>
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<description>یگانگی را تنها در برقراری حق و عدالت و احترام بر آزادی اندیشه ها و کیان انسان مفهوم است</description>
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<lastBuildDate>Thu, 06 Aug 2009 08:35:04 GMT</lastBuildDate>
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<title></title>
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<description> &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#cc3300 size=4&gt;با عرض پوزش به خاطر غیبت چند ماه ام در این وبلاگ، لطفا ادامه ی مطالب این وبلاگ را در وبلاگ &lt;/FONT&gt;&lt;A href=&quot;http://www.kungfu777.blogfa.com/&quot; target=_blank&gt;&lt;FONT color=#cc3300 size=4&gt;کان کفو توان&lt;/FONT&gt;&lt;/A&gt;&lt;FONT color=#cc3300 size=4&gt; مطالعه بفرمایید.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Thu, 06 Aug 2009 08:35:04 GMT</pubDate>
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<title>سلام بر آنکه هدایت را می پذیرد</title>
<link>http://yeganehagh.blogfa.com/post-19.aspx</link>
<description>&lt;P align=center&gt;&lt;IMG height=86 alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot;http://i36.tinypic.com/2wc04yc.png&quot; width=316 align=baseline border=0&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;IMG alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot;http://i35.tinypic.com/1zqcwo2.jpg&quot; align=baseline border=0&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;گر طالب حقیقتی به نام حضرت حق م الله میم بر کلمه ی مالک م الله در زیر کلیک کن &lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;و نه به دعوت بلکه همچون همه ی ذرات هستی به امرش م الله گو و دانه ی دانایی ات &lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;را متبلور کن و به سوی دانایی مطلق روان شو&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;A href=&quot;http://www.meraj192.com/&quot; target=_blank&gt;&lt;FONT color=#ffff33 size=7&gt;م الله&lt;/FONT&gt;&lt;/A&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Mon, 06 Oct 2008 17:06:18 GMT</pubDate>
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<title>میلاد یار</title>
<link>http://yeganehagh.blogfa.com/post-18.aspx</link>
<description>&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آمد  بهار  عاشقان  تا  خاکدان  بستان  شود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آمد  ندای   آسمان  تا   مرغ   جان  پران  شود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;هم بحر پر گوهر شود هم شوره چون کوثر شود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;هم سنگ لعل کان شود هم جسم جمله جان شود&lt;/FONT&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;DIV align=center&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt; &lt;IMG style=&quot;WIDTH: 186px; HEIGHT: 266px&quot; height=364 alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot;http://i35.tinypic.com/6dqutw.jpg&quot; width=178 align=baseline border=0&gt;&lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;میلاد یگانه منجی، آن آواز خوان حق و حقیقت قبله ی دل عاشقان طریقت&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;جمال جان و صفای دل رهروان دانایی، آمده از عالم یکتایی به هفت روز &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;خلقت &lt;/FONT&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;از خالقیت بر همه ی عاشقان حقیقت و رهروان طریقت مبارک باد.&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;1و1 یکتا 11 / 7 / 1318&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;
&lt;HR&gt;
 &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;رندان  سلامت  میکنند  جان  را  غلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;مستی ز جامت می کنند  مستان  سلامت  میکنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;در  عشق  گشتم  فاش  تر  وز  همگنان  قلاش  تر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;وز دلبران  خوش باش تر  مستان سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;غوغای   روحانی   نگر    سیلاب    طوفانی    نگر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;خورشید  ربانی   نگر   مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;افسون   مرا  گوید   کسی  توبه ز من جوید  کسی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;بی  پا چو من  پوید کسی مستان سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای    آرزوی    آرزو     آن    پرده   را    بردار   ز    او&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;من  کس  نمی دانم  جز او  مستان سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای    ابر   خوش   باران  بیا   ای  مستی   یاران   بیا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;وای  شاه   طراران  بیا   مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;حیران  کن   و   بی  رنج  کن  ویران کن  و پر گنج کن&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;نقد  ابد   را   سنج  کن   مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;شهری   ز   تو  زیر  و  زبر  هم   بی خبر  هم  با  خبر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;وای  از  تو  دل  صاحب  نظر مستان سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن  میر   مهرو   را  بگو   و آن  چشم   جادو   را   بگو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  شاه  خوشخو  را بگو  مستان سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن  میر   غوغا  را  بگو  و آن  شور  و   سودا   را  بگو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و   آن  سرو   خضرا  را بگو مستان  سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آنجا که یک با خویش نیست یک مست آنجا بیش نیست&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آنجا  طریق  و  کیش  نیست  مستان سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن  جان  بی  چون  را  بگو  و  آن  دام  مجنون  را  بگو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  در  مکنون  را  بگو  مستان  سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن  دام  آدم   را   بگو   و  آن   جان   عالم   را   بگو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  یار و  همدم  را  بگو مستان سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن  بحر   مینا  را  بگو  و  آن   چشم   بینا   را   بگو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  طور  سینا  را  بگو  مستان  سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن  توبه  سوزم  را  بگو  و  آن   خرقه   دوزم  را  بگو &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  نور  روزم  را  بگو  مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن  عید  قربان  را  بگو    و  آن  شمع  قرآن   را   بگو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  فخر  رضوان  را  بگو  مستان سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  شه  حسام  الدین   ما   ای   فخر   جمله   اولیا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  از   تو  جانها   آشنا   مستان   سامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;رو   آن  ربابی   را   بگو  مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  مرغ  آبی  را  بگو  مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  میر  ساقی  را  بگو  مستان  سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  عمر  باقی  را  بگو  مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  میر  غوغا  را   بگو   مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و  آن  شور  و  سودا  را  بگو  مستان سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  مه  ز  رخسارت  خجل  مستان  سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;وای   راحت  و   آرام  دل   مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  جان  جان  ای  جان  جان  مستان  سلامت می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  تو  چنین  و  صد  چنان   مستان   سلامت   می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;اینجا  یکی  با  خویش  نیست  مستان  سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;یک  مست  اینجا  بیش  نیست  مستان  سلامت  می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای     آرزوی      آرزو      مستان      سلامت      می کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آن   پرده   را    بردار   ز   او   مستان   سلامت   می کنند &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;سودای   تو   در   جوی   جان  چون   آب   حیوان   می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آب   حیات   از   عشق   تو   در   جوی    جویان    می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;عالم     پر     از    حمد    و    ثنا    از     طوطیان    آشنا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;مرغ   دلم    بر    می پرد    چون    ذکر    مرغان   می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;بر  ذکر  ایشان  جان  دهم  جان  را  خوش  و  خندان  دهم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;جان  چون  نخندد  چون  ز  تن   در   لطف   جانان   می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;هر   مرغ  جان  چون  فاخته   در   عشق   طوقی   ساخته&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;چون    من    قفس   پرداخته  سوی   سلیمان    می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;از  جان  هر  سبحانی  ای  هر   دم   یکی    روحانی  ای&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;مست  و  خراب  و  فانی ای  تا  عرش  سبحان  می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;جان  چیست   خم   خسروان   در   وی  شراب   آسمان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;زاین  رو  سخن  چون  بیخودان  هر  دم  پریشان می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;در   خوردنم    ذوقی    دگر    در    رفتنم    ذوقی    دگر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;در   گفتنم   ذوقی   دگر   باقی   بر   این   سان  می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;میدان  خوش  است  ای  ماه  رو  با  گیر  و  دار  ما  و  تو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  هر که  لنگ  است  اسب  او لنگان ز  میدان  می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;مه   از   پی   چوگان   تو   خود   را   چو   گویی   ساخته&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;خورشید  هم  جان  باخته   چون   گوی   غلتان   می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;این   دو   بسی    بشتافته    پیش    تو     ره     نایافته&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;در    نور    تو    در     بافته     بیرون     ایوان    می رود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;چون   نور  بیرون  این  بود  پس  او  که  دولت  بین  بود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;یارب  چه  با  تمکین   بود   یارب  چه  رخشان   می رود&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;IMG alt=&quot;&quot; hspace=0 src=&quot;http://i34.tinypic.com/d3c2.jpg&quot; align=baseline border=0&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;
&lt;HR&gt;

&lt;P&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;چه نیکبخت کسی که خدای خواند تو را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;در آ  در  آ  به  سعادت  درت  گشاد خدا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;که  دانه  را  بشکافد  ندا  کند  به  درخت&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;که  سر  بر  آر  به  بالا  و می فشان خرما&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;  &lt;/FONT&gt;
&lt;DIV&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;
&lt;HR&gt;
&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  که  به  هنگام  درد  راحت جانی  مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;وای  به  تلخی   فقر   گنج   روانی   مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آنچه نبردست وهم عقل ندیدست و فهم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;از  تو  به  جانم  رسید  قبله  از  آنی  مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;از  کرمت  من  به   ناز   مینگرم   در   بقا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;کی    بفریبد    شها    دولت   فانی   مرا ؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;نغمت   آن  کس   که   او مژده ی  تو  آورد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;گر چه  به  خوابی   بود   به  ز  اغانی   مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;سجده کنم من ز جای روی نهم من به خاک&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;گویم   از  اینها   همه  عشق   فلانی   مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;عمر   ابد   پیش   من  هست  زمان  وصال&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ز آنکه  گنجد  در   او   هیچ    زمانی    مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;گوهر  معنی  اوست  پر  شده جان و دلم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;اوست  اگر گفت نیست ثالث  و  ثانی  مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;رفت  وصالش  به  روح جسم  نکرد  التفات&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;گر  چه   مجرد  ز  تن  گشت  عیانی  مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;پیر  شدم  از  غمش  لیک   چو   تبریز  را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;نام   بری  باز  گشت  جمله  جوانی   مرا&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;DIV&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;
&lt;HR&gt;
&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;از آن مایی ای مولا اگر امروز اگر فردا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;شب و روزم ز تو روشن زهی رعنا زهی زیبا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;تو  پاک  پاکی  از  صورت  ولیک  از  پرتو  نورت&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;نمایی  صورتی هر دم چه با حسن و چه با بالا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;چو ابرو را چنین کردی چه صورت های چین کردی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;مرا بی عقل و دین کردی بر آن نقش و بر آن حورا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=3&gt;مرا گویی چه عشق است این که نی بالا نه پست است این&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;چه صیدی بی زشست است این درون موج این دریا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ایا معشوق هر  قدسی چو  میدانی چه  میپرسی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;که سر عرش و صد کرسی ز تو ظاهر شود پیدا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;زدی  در من یکی آتش که شد جان  مرا  مفرش&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;که تا آتش شود گل خوش که تا یکتا شود صدتا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;فرست آن عشق ساقی را بگردان جام باقی را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;که از موج و تلاقی  را   ندانم  جامش  از  صهبا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;بکن این رمز را تعیین بگو مخدوم شمس الدین&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;FONT face=Tahoma&gt;به  تبریز  نکو  آیین  ببر این  نکته ی  غرا&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt;  &lt;BR&gt;  &lt;/FONT&gt;
&lt;DIV&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;
&lt;HR&gt;
&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc6600&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;در دو جهان لطیف و خوش همچو امیر ما کجا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ابروی  او  گره نشد گرچه که دید صد خطا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;من  ز  سلام  گرم  او  آب شدم ز شرم او&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;و از  سخنان  نرم  او  آب شوند   سنگ ها&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;زهر  به  پیش  او  ببر  تا  کندش به از شکر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;قهر  به  پیش  او  بنه  تا  کندش  همه رضا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آب  حیات  او   ببین  هیچ   مترس  از   اجل&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;در  دو   در  رضای  او   هیچ   ملرز   از   قضا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;سجده  کنی  به  پیش  او  عزت مسجدت دهد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;ای  که  تو  خوار  گشته ای  زیر  قدم چو  بوریا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;خواندم  امیر  عشق  را  فهم  بدین شود تو را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;چونک تو  رهن  صورتی  صورت توست رهنما&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;از  تو  دل  ار  سفر  کند  با  تپش  جگر   کند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;بر  سر  پاست  منتظر  تا تو  بگویی  اش  بیا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;بام و هوا تویی و بس نیست روی بجز هوس&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آب  حیات  جان  تویی  صورت ها  همه  صقا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;دور  مرو  سفر  مجو  پیش  تو  است  ماه  تو&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;نعره  مزن  که  زیر  لب  می شنود  ز  تو دعا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;می شنود   دعای  تو  می دهدت  جواب   او&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;که  ای  کر  من  کری  بهل گوش تمام برگشا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;گر  نه  حدیث  او  بدی  جان  تو  آه  کی زدی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;آه   بزن   که   آه  تو  راه   کند   سوی   خدا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;چرخ زنان بدان خوشم که آب به بوستان کشم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;میوه رسد ز آب جان شوره و سنگ و ریگ را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;باغ چو زرد و خشک شد تا بخورد ز آب جان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;شاخ  شکسته  را   بگو  آب  خور   و  بیازما&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;شب  برود  بیا  بگه  تا  شنوی  حدیث  شه&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=Tahoma color=#cc6600 size=4&gt;شب همه شب مثال مه تا به سحر مشین ز پا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sun, 28 Sep 2008 17:06:18 GMT</pubDate>
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<title>فرقه ی شیطانی</title>
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<description>&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;7/7/1387&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc9900&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;با سلام خدمت هم میهنان عزیز و گرامی.&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;دیده میشود که در سال جاری حکومت ننگ نامردمان با استفاده از تمامی ابزارهای غصب شده ی اجتماعی و با تمام قوای خود و از طرق گوناگون از جمله صدا و سیما – رادیو – روزنامه ها و مجلات و ویژه نامه های رایگان به صورتی گسترده به عرفان های الهی و پیروان و بنیانگذاران آنها حمله ور میشود و همچون درنده ای زخمی که در حال از دست دادن آخرین قطرات خون خود می باشد در راه توهین به اندیشه های انسانها به هر سویی ناشیانه چنگ میزنند و با بیان واژگان نامانوس و نا آشنا در جامعه ی مان مانند واژه ی فرقه قصد رادیکال نمودن اندیشه ها و انحراف و فریب مردمان را دارند تا با ضعیف نشان دادن حرکت های مردمی و عرفانی و حقیقت جو و خطرناک جلوه دادن آنها، اذهان عمومی را در مقابلشان واکسیناسیون نمایند و از اندیشه به آنها باز دارند. اما غافل از اینکه حقیقت نور است و تاریکی را محکوم به نابودی میکند و گر حرکتی آغشته به نور حقیقت باشد انسانها خود آن را خواهند دید و بر آن به اندیشه و قضاوت خواهند نشست. اینجانب با توجه به وضوح غیر عقلانی بودن و بی بنیان بودن علمی و انسانی و منطقی این گونه حرکات و با اعتقاد به رسوا بودن این اعمال معلوم الحال خطی در نطفه ی حرکت خود نزد عموم مردم، همراهان و بزرگان عرفان های الهی را در مقام پاسخ به این جریان فاسد و تروریستی و فاشیست مابانه ندیده ام و نمی بینم و حتی خود نیز به جز در موردی که آنها به صورتی مستقیم به بزرگ مرد سرزمینمان و راهبر طریقت دانایان توهین نموده بودند در این باب لب به سخن نگشودم و آن سخن هم پاسخ گفتار باطل و گزاف آنها نبود بلکه نامه ای بود خطاب به همه ی ملت ایران و متاثر از کردار شیطانی آنان تا در مقابل اینگونه شیطنت ها هوشیارتر باشند و به راه های پیش رویشان برای رهائی و نجات بیشتر از اینها بیاندیشند، چرا که گاها ً دیده شده است گروهی از باده ی خود بینی سرمست گشته اند و دوست را دشمن و دشمن را دوست انگاشته اند و خود و جامعه را رو به ویرانی نهاده اند و بزرگترین خیانت ها را به انسانیت و انسانها روا داشته اند و خود را هم در رنج بی پایان فرو برده اند، بر این گروه اندک واجب است که هر چه سریعتر به خود آیند و به اندیشه ی بیشتر بنشینند. موضوعی که در این زمان بار دیگر باعث شد که بنده سکوت خود را در این باب بشکنم برنامه ی تلویزیونی است که در شب های ماه رمضان هر شب از کانال یک سیما پخش می شود و اینجانب به صورتی کاملا ً اتفاقی و ناخواسته با آن برخورد نمودم که لازم به ذکر است این برنامه گاها ً باعث خنده و گاه تاسف اینجانب و اینک هم باعث روشنتر شدن اینجانب گشته است که به این دلیل تشکر از سازندگان آن برنامه را نیز در این نامه لازم و شرط ادب خویش می دانم. در این برنامه که نام آن ( این شب ها ) بود، شخصی با عنوان مهندس نیلوفری که خود را محقق فرقه ها می نامید به بیان ویژگی ها و خطرات فرقه ها می پرداخت و با شجاعتی مثال زدنی در حرکتی به ظاهر مخالف با فرقه های مردمی و محلی، ولی در عمل به افشای فرقه ی حاکم و خطرناک و ضد مردمی آخوندیسم می پرداخت. به عنوان مثال در اینجا به بیان بخشی از افشاگری های دلیرانه ی ایشان در باب فرقه ی آخوندیسم حاکم بر کشورمان میپردازم. از جمله ویژگی های ذکر شده ی فرقه ها از سوی ایشان یکی این بود که در فرقه ها به تقدس نمایی کاذب و کذب رهبران و سوء استفاده از احساسات مذهبی انسانها پرداخته می شود که برای مثال می توان به دست بر سر مردم کشیدن و یا اهدای چپیه به جهت تبرک و شفا از سوی رهبر فعلی فرقه ی آخوندیسم یعنی خامنه ای خام عقل و یا خمینی بنیانگذار این فرقه که نفرت اندیشه اش ایرانمان را ویرانه ساخت، اشاره نمود که با رجوع به نشریات داخلی این فرقه در سپاه و یا ارتش و بسیج میتوان به تلاش واضح این فرقه در جهت تقدس نمایی رهبران آن با بیان داستانها و خاطرات جعلی و دروغین و خرافی در این نشریات اشاره نمود. از دیگر بیانات ایشان می توان به چپاول اموال بیت المال از سوی فرقه ها و ساختن بناها و یا گورستانهای طلایی برای رهبران فرقه نام برد، که باز هم نمودار بارز آن در کاخ های حاکمان این فرقه و یا گورستان گنبد طلایی رهبر پیشین این فرقه قابل مشاهده می باشد. از دیگر نشانه های فرقه ها ی خطرناک که ایشان اشاره نمودند میتوان به سوء استفاده از احساسات انسانها و تحریک آنها در جهت قدرت طلبی سردمداران فرقه و مسخ نمودن افراد توسط آنها برای رسیدن به اهداف خود اشاره نمود که باز هم نمودار بارز آن را هموطنان عزیز در هشت سال جنگ تحمیل شده از سوی فرقه ی آخوندیسم به ملت عزیزمان مشاهده نمودند و دیدند که این فرقه ی غیر انسانی با سوار شدن بر احساسات کور جوانان و نوجوانان و حتی کودکان چگونه قدرت اندیشه را از آنها ربوده و آنها را بی جهت بر روی مین ها و جلوی تانک های حکومت بعثی عراق می انداخت و علاوه بر پایمال نمودن خون این انسانهای شریف با همان خون به فریب و مسخ خانواده ها ی آنها می پرداختند و هنوز هم اینچنین می کنند و بی شرمانه اعلام هم مینمودند که انقلاب خون خوارشان را، خون آبیاری میکند.! همچنین به وضوح جهانیان میدانند که این فرقه با عنوانهای آدم فریبانه و در جهت گسترش جنایات خود با عناوین حمله های شهادت طلبانه و انتحاری، آرامش و امنیت حیات انسانها را در سرتاسر زمین به خطر انداخته است و صبر جهانیان در حال از این مقوله ی غیر انسانی به پایان رسیده و آبروی تاریخی ملت ایران در جهان به نیستی کشانده شده است و تروریست فرقه ای برای طرفداران این فرقه یک ارزش الهی و ابزار حرکت شمرده می شود، این فرقه آنچنان نوید ورود به بهشت در صورت انجام عملیات تروریستی و انتحاری را به هوادارانش میدهد که انگار کلید درب های بهشت یا جهنم در دست ملایان و رهبران فرقه ی تباه آخوندیسم است.! از جمله ی دیگر ویژگی های ابراز شده در باب فرقه ها از سوی مهندس نیلوفری میتوان به ویژگی عدم تحمل نظرات مخالف از سوی مجذوب شدگان فرقه ها و رهبرانشان اشاره نمود که با سپاس مجدد از این اشاره ی به جای ایشان در افشای حکومت فرقه ی اهریمنان حاکم شده بر کشورمان، برای مثال همین حرکت گسترده ی ملایان بر ضد فرق یا گروه های دیگر و وجود زندان ها و زندانیان و اعدامیان سیاسی و همچنین فیلترینگ اینترنت و یا جمع آوری آنتن های ماهواره و سانسور شدید خبری و فرهنگی در جامعه ی ایران را اشاره مینماییم. از ویژگی های دیگر مورد بحث توسط ایشان در این برنامه، میتوان به سوء استفاده از نام منجیان الهی و ادعاهای ارتباط با آنها از سوی برخی فرقه ها اشاره نمود که این مطلب هم همان گونه که همه ی هم میهنان میدانند از همان ابتدا ابزار دست رهبران و اعضای فرقه ی آخوندیسم در جهت سوء استفاده از اعتقادات دینی و مذهبی و فریب مردمان برای ایجاد حاکمیت بر آنان بوده است، تا آنجا که رئیس جمهور این فرقه ی شیطانی برای امام زمان میز و صندلی و در هنگام صرف غذا بشقاب مخصوصی در کنار خود قرار میدهد و می خواهد نشان دهد که امام زمان، نان خور سفره ی حرام ایشان است ولی غیب است و با وی در ارتباط و مردم به این دلیل باید از وی و حکومت ننگینشان حمایت کنند.! البته همگان اینک میدانند که امام زمان جعلی و دروغین ساخته ی اوهام و سیاست های رهبران این فرقه هرگز آشکار نخواهد شد چرا که احتمالا ً قدرت اصلاح امور اجتماعی را ندارد و در صورت آشکاری رسوا خواهد شد و البته پرواضح است که ملایان این فرقه با امام زمان حقیقی دشمنی می کنند چرا که با حضور وی حکومت ملایان هم باید به پایان برسد، درست به همین دلیل رهبران این فرقه منجی حقیقی انسانها را بزرگترین خطر و دشمن خود می دانند و بارها رسما با بی شرمی عنوان داشته اند که امام زمان باید مورد تایید حوزه ی علمیه ی این فرقه ی شیطانی قرار گیرد و گر جز این باشد باید با وی جنگید، و چه بسیار مسائل دیگر در این باب از سوی رهبران این فرقه ی خرافی که هم میهنان خویش بهتر میدانند و نیاز به تکرار آنها نیست. موضوع دیگری که جناب مهندس نیلوفری به طور غیر مستقیم بر آن تاکید می نمودند لزوم ایجاد گروه های مردمی در جهت برخورد با فرقه ها بود که باز هم جا داد از ایشان و تلاش هایشان در جهت سرنگونی هر چه سریعتر فرقه ی شیطانی حاکم بر میهنمان سپاسگذاری نماییم. چرا که فرقه ی آخوندیسم همان طور که ایشان هم به طور غیر مستقیم بیان داشتند فرقه ای آزاد و مردمی نیست و برای حیات جامعه بسیار خطرناک بوده و می باشد، چنان که ورود و خروج در این فرقه همانند فرق دیگر تنها با میل و گرایش فرد نیست، بلکه این فرقه با در دست داشتن ابزار سیاسی اجتماعی و سرمایه های ملی از راه های گوناگون سعی در جذب افراد و به خدمت گرفتن آنان در درون گروه خود دارند و با اختصاص دادن امتیازات و امکانات  اجتماعی به اعضای فرقه ی خود و ترویج خرافات متحجرانه و شسته شوی مغزی، آنان را فریب و مسخ افکار شیطانی خود می نمایند و همان گونه که همگان میدانند خروج از این فرقه هم به صورت آزادانه امکان پذیر نیست و فرد متقاضی یا اعلام کننده ی خروج از دایره ی فکری این فرقه، با احکامی همچون ارتداد و یا جاسوس و منافق مواجه می شود که در بسیاری از موارد جان خود و خانواده اش در خطر جدی قرار می گیرد. همچنین فرقه ی سیاسی آخوندیسم مانند فرق دیگر به مسائل اعتقادات فردی و سیر و سلوک عرفانی نمی پردازد بلکه به صورت مستقیم به تحمیل عقاید پوچ خویش و ایجاد جو نظامی و پلیسی بر اجتماع و میدان دادن به ارازل و اوباش خود در جهت زیر پا نهادن آزادی های فردی و اجتماعی و تسلط بر اموال عمومی و حفظ حاکمیت خود و شهوت رانی و قدرت طلبی می پردازند. از بیانات دیگر ایشان هم مسخ و بی اندیشه شدگی اعضای فرقه ها بود که باز نمود آن را در جنایات کوی دانشگاه و به خاک و خون کشیده شدن جوانان و گوهرهای تابناک سرزمینمان توسط اعضای فاقد اندیشه ی این فرقه ی شیطانی میتوان مشاهده نمود، و یا قتل های زنجیره ای و حمله ی کور کورانه ی ارازل و اوباش این فرقه به سوی مردم در تجمعات و راهپیمایی های حق طلبانه. چکیده ی سخن را در این باب کافی میدانم که حقیقت این ماجرا از نور روز هم برای همگان واضح تر است. با امید به اینکه هم میهنان عزیز با شناخت هر چه بیشتر این فرقه ی فقیر و به پوچی رسیده، که سالهاست شان انسانها و حرمت اندیشه ها را زیر پاهای آلوده به خون خود نهاده اند، هرچه سریعتر در جهت سرنگونی و منزوی سازی این فرقه ی فقیر آخوندی که هیچ اندیشه ای را جز خود پذیرا نیست و با ترور و تحدید و نفرت پراکنی در جامعه قصد تفرقه برای ادامه ی حیات ننگین خود را دارد اقدامات لازم را انجام دهند و آگاه باشند و دیگران را هم از این تنها فرقه ی شیطانی اجتماعمان آگاه نمایند و هرچه سریعتر به مبارزه ای علنی و متحدانه و همه جانبه بر علیه آن بپردازند. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc9900&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;نتیجه گیری : 1- چون فرقه ی آخوندیسم فاقد هرگونه تز و اندیشه ی علمی و راهبردی برای کمال و زندگی سعادت مند بشری است شایسته ی نام فرقه ی متحجر و خرافی می باشد و باید از ادامه ی فعالیت آن جلوگیری شود. 2- چون فرقه ی آخوندیسم فاقد هرگونه بنیان فکری و منطقی و دینی می باشد و تنها با ترویج خرافات مذهبی و پنهان گشتن پشت نقاب ادیان و سوء استفاده از احساسات دینی مردمان می تواند به بقای خود ادامه دهد لازم است همه ی اندیشمندان هرچه سریعتر در راستای افشای مقاصد و جنایات شیطانی این فرقه دست به قلم برده و اقدامات لازم را به انجام رسانند. 3- چون فرقه ی آخوندیسم با انجمادات فکری خاص خود به حریم مقدس انسانها و اندیشه های آنان حمله ور می شود هرچه سریعتر باید ابزار اجتماعی و فرهنگی از دست مزدوران این فرقه خارج شود. 4- به دلیل ویرانی و چپاول اموال عمومی ملت ایران توسط این فرقه، تمامی اعضای آن باید مورد تعقیب قرار گیرند و در یک دادگاه بین المللی محاکمه شوند. 5- با توجه به اینکه فرقه ی آخوندیسم با ظلم و زور و ترور و ارعاب تا به حال مقاصد شوم خود را پیگیری نموده و این فرقه هیچگونه سنخیت و نزدیکی با فرهنگ جوامع انسانی ندارد حق ادامه ی حیات نداشته و باید توسط محاکم بین المللی هرچه سریعتر محکوم و اموال نامشروع آن مصادره گردد. 6- به دلیل زیر پا نهاده شدن تمامی حقوق انسانی توسط اعضای این فرقه ی شوم، رسانه ها و پروژه های اقتصادی این فرقه باید هرچه سریعتر توسط مردم ایران مورد تحریم قرار گیرد. 7- اعضای این فرقه حق هیچگونه سخن گویی از جانب ملت ایران در مجامع بین المللی را ندارند و هرگونه مشروعیت بخشی کشورهای خارجی به این فرقه ی شیطانی و یا حمایت از آنها در آینده ی رابطه ی ملت ایران با دولت های این کشورها تاثیر خواهد گذاشت. 8- به دلیل سوء استفاده ی رهبران این فرقه از نام اسلام و پنهان شدنشان پشت نقاب اسلام، و در نتیجه بد نامی و ایجاد اسلام ستیزی در جهان، همه ی کشورها و همه ی مسلمانان جهان باید با برپایی تظاهرات و محکوم نمودن اعمال شیطانی این فرقه صدای اعتراض خود را به گوش نا شنوای سردمداران این فرقه برسانند و آنها را مجبور به عقب نشینی از مواضع باطلشان نمایند.&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#cc9900&gt;&lt;FONT size=4&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;نصر من الله و فتح ٌ قریب&lt;/FONT&gt; &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;FONT color=#cc9900 size=4&gt;
&lt;HR&gt;
 &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;ایرانیان که فر کیان آرزو کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;باید نخست کاوه ی خود جستجو کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;مردی بزرگ باید و عزمی بزرگتر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;تا حل مشکلات به نیروی او کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;ایوان پی  شکسته  مرمت نمی شود&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;صد بار گر بدنش رنگ و رو کنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;A name=0.1_graphic02&gt;&lt;FONT color=#cc9900 size=4&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/A&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;
&lt;CENTER&gt;&lt;FONT color=#cc9900 size=4&gt;
&lt;HR&gt;
&lt;/FONT&gt;&lt;/CENTER&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#cc9900 size=4&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;آن را که اسرار حق آموختند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;همچو شعله جان او افروختند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;همچو هیزم جسم او را سوختند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;چون دهانش وا شد آن را کوفتند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;حق ندارد خامشی چون، ناحق است&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;هرکه گفت حق خامش است آن ناحق است...!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#cc9900 size=4&gt;نویسنده : کامرون&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sun, 28 Sep 2008 16:51:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>yeganehagh</dc:creator>
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<title>امام زمان کیست ؟ 3</title>
<link>http://yeganehagh.blogfa.com/post-16.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;مهدی کیست (3)&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;والعصر اناالانسان لفی خسر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;بنا بر نیاز برخی همراهان عزیز بر آن شدم تا توضیحاتی مبنی بر مبنای علم کلام در عرفان مایگاهی یا کونگ فو توآ را در این قسمت برایتان ذکر نمایم تا انشاالله پاسخی باشد به برخی سوالات همراهان و هم میهنان عزیز.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;یکی از اسرار آمیزترین مطالب کتب آسمانی بی شک مکاشفات یوحنا در انجیل میباشد که رمز گشایی آن اذهان بسیاری از متفکرین و عرفای زمانها را به خود معطوف داشته است. در ابتدای این مکتوب آمده : ( در ابتدا کلمه بود کلمه نزد خدا بود و خدا کلمه بود ) در دین اسلام این اشارت به بیان : (( کلام الله مجید )) رفته است، همچنین عرفا و پیشوایان دینی هم کرارا ً در مکتوبات خود به اهمیت و رمز گونه بودن کلام اشاراتی داشته اند، آنچنان که حضرت علی (ع) میفرمایند : دانشهای علم حروف از دانش های در بسته است که جز دانشمندان ربانی ندانند. در دین اسلام هم که آخرین معجزه کلام شد و کلام معجزه نامیده شد و تنها وسیله ی و حجت رسالت.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;بی شک سوال بر انسان جایز است و علامت پویایی اندیشه و نشان انسان. اما شکوه خلقت خالق در این است که در نظام هستی هر سوالی را پاسخی است و با شکوهتر اینکه پاسخ، پیشتر از سوال است و ما سوال مینماییم در حالی که آن سوال پاسخ داده شده و ما تنها وظیفه ی یافتن آن پاسخ را داریم، همچنین شایسته است که بیاندیشیم که اصولا ً سوال از کجا میدانیم، چرا که مبداء سوالات عالیه در اندیشه ی انسان خود مجهول است. پس بر انسان باید آموخته شود که پیشتر از قضاوت تحقیق نماید و سوال کند و بر همگان باید گفته شود که به جای قضاوت شتابزده، سوال کنند و به قوت تحقیق از هر سوال سوالات و از هر پاسخ پاسخ ها را بیابند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;اسرار خلقت به نیروی اندیشه و کلام اندیشه ساز گشوده میشوند، اما اسرار اندیشه بر انسان ها تا کنون پوشیده بوده و سر اسرار سر ممنوع است. آنکه از این اسرار پرده برداشت از کاوش برون در درون خود رفت و در خود نگریست پس پرده از اسرار سر و سر درون برداشت و اقرا از ندای نای میان بر زمان کرد و طنین صدایش صدای نای کل هستی و نقلش ز عقل اول گشت. حال حکم، حکم کلام است که کلمه کل مه یا مالک کل مجهولات است و زمان پرده برداری از اسرار خلقت به قدرت کلمه و کلمه خود یگانه قدر و قدرت است، این لحظه لحظه ی فرا رفتن از نسبیت ها و سخن گفتن از مطلق ها به قوت خود سخن و درک اسفار سخن است و بدین پایه به زبان، حق آنچنان خوانده شد که تضاد بین فلسفه و علم و دین و دانش در طریقت دانایان از میان برداشته شود و محدوده های ذهنی کلاسیک یا قالب های فکری و سنتهای فکری اندیشه ی آدم که موجب گرفتاری و سرگشتگی وی گشته اند از میان برداشته شوند تا آدم حقیقت را یابنده گردد. در کلام، عالم بی حدود در نمادهای محدود است و این سبب سرعت یا بی زمانی در زمان می گردد و باعث می شود که انسان با دانایی بر آن به قوه ی عقل و اندیشه و دین و دانش که آفریده ی همان اندیشه اند به کار عدن در آید و ز آن محافظت نماید، نه اینکه کلام تنها ابزار اندیشه شود بلکه خود الهام بخش و اندیشه بر کلام با قوت کلام یعنی خدایی که به قوت خود، خود را میبیند و بصیرت بر خود میابد. ( فتبارک الله احسن الخالقین ).&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;دانشمندانی هستند که بر عالم برون با هدف یافتن اسرار هستی در کنکاشند، آنان خلق جهان را به لحظه ای یافتند و نام بر آن انفجار بزرگ نهادند و در عالم درون و ادیان این به کلام الله، اشارت نظری بود تا بصیرتی حاصل شود و گویند که جهان با یک نظر و اشاره خلق گردید.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;پس در ابتدا یک دانه به عالم ماده آفریده شد و در دانه، دانایی یا کلام یا خدا و خدا همه جا بود یعنی آنکه عقل هستی در هسته و دانه ی اول بود تا بعد از آفرینندگی، صفت پروردگاری خالق هم به وسیله ی انتقال امر یعنی کلام که خود از خالق جدا نبود، به انجام رسد و خدا خود امر است و اراده ی خداوند را کلام نامیم که در خود کن فیکون است و بی زمان ولی به پروردگاری در زمان حی است و دانه را به دانه ها میرساند. آنچنان که جوجه ای پوسته ی تخم خود بشکافد و مادر را نتواند که زان پوسته در آمدن کمکش کند. این خالق است که کلمه یا خود را در نطفه میگذارد و به قوت پروردگار بر او می شود و راه را بر او مینمایاند درست به همان سان که در اندیشه ی و ژن آدم هم مینشیند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;در عالم اسفل ذرات بی جرم در نهایت سرعت روان و در برخورد دو جهان اندر مدارات انرژی روان به پیوستگی و ایجاد منبع جاذبه به شکل انرژی متراکم یا ماده نمود بودن در جهان بودن گشت. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;به زبان فیزیک سرعت حرکت بر قابلیت تبدیل ماده به انرژی و یا نور که حد فاصل این ماده و انرژی است اثر گذار است و انرژی = جرم × سرعت به توان 2 یعنی E = MC2  پس نتیجه میگیریم m یا ماده هم مساوی است با مجزور سرعت در انرژی یعنی حالتی که به سبب آن سرعت حرکت انرژی به پایینتر از سرعت نور برسد و اینجاست که می گوییم : &lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;((&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot;&gt; &lt;B&gt;و آنگاه ميرْ مالک پنهان، صورتِ هستی را در كمرِ كيهان يعنی زمين به زايش نهاد و خلقتِ ماده را در آن شكلِ كمال داد. پس، از تندی به كُندی و زمان رسيد و خود را در همه ی زوايا ديد و خلقت را در مكتوب بَنابُن تا بی ‌پايان قرار داد و جهان را پايانِ بی ‌آغاز تا در اين آزمونگاه، خلقت به تكثير انواع و گونه‌ها برسـد و تمـامی زوايـای هستـی به درک امواج و تبديلات، از كهكشانهای دور و نزديک بررسی گردد تا پسندِ خلقت&lt;/B&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;B&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot; face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#ff6600&gt;صورت گيرد ))&lt;/FONT&gt; &lt;/B&gt;زمان و جرم دو مقوله ی نسبی است که با سرعت در ارتباط مستقیم می باشد و سرعت ذرات تعیین کننده ی خاصیت و طول موج حرکت آنها خواهد بود. سرعت انرژی در انسجام انرژی بالاست و زمانی که منبع انرژی انبساط یابد سرعت آن کاهش میابد سرعت پایین انرژی آن را به ماده تبدیل میکند و انبساط انرژی متراکم اولیه به این ترتیب موجب به انسجام توده های پراکنده ی انرژی و در نتیجه خلق ماده می شود اما در نظام طبیعت ماده و انرژی دائما ً در حال تغییر و تبدیلند و هیچگاه ثابت نمیمانند انرژی = جرم × سرعت در این حالت انرژی و جرم ثابت است و میزان آن مساوی می باشد اما در حالت انرژی = جرم × سرعت به توان 2 ماده کم می شود و قسمتی از آن تبدیل به انرژی می شود پس سرعت مبنا در درک جهان و یا سرعت میان یا سرعت اولیه سرعت نور است و نور حالتی است میان ماده و انرژی که قابل تبدیل به هر یک از آنها می باشد و به زبان قرآن الله مبداء و نور آسمانها و زمین است( الله نور السماوات والارض ) به این سبب در مکاشفات یوحنا میگوید من الف و یا هستم، من ابتدا و انتها هستم، و یا در قرآن : هو الاول الآخر، او اول است و آخر. پس ماده زمانی بیشتر می شود که در سرعتی نزدیک به سرعت نور به آن انرژی بیشتری وارد شود در این حالت نه تنها از سرعت نور فراتر نمی رود بلکه انرژی اضافه تبدیل به ماده شده و بر جرم آن یا مقدار ماده افزوده میشود. در سرعت نور هر ذره ای به نور تبدیل میشود و ماده از خاصیت ماده به پلاسما در می آید و این حرارت و انفجار ایجاد میکند. پس نتیجه میگیریم تراکم ذرات تا مرز c انفجار و تبدیل به انرژی مطلق در c2 و دوباره در نتیجه ی انفجار انبساط و کاهش c و یا مجزور سرعت و تبدیل انرژی به ماده. و این چنین جهان پنهان به آشکار و آشکار به پنهان در سه سیکل یا دایره ی سرعت عالم همراه به تبدیلند و این چرخش و نوسان سرعت در سه دایره ی متداخل با یکدیگر در عالم ترسیمات به کمال قابل تشریح است.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;سرعت بیشتر از برخورد دو جهان آغازگر جهان سوم و یا خلق جهانی دیگر است. خلق میان، خلق جهانی که ناشناخته بود چراکه کل چیزی است فراتر از مجموع اجزاء و خاصیت های منحصر به فرد را جلوه گر میسازد. جهان بی جرم و بی زمان تا جهان اجرام و زمان زان پیش هر یک به خاصیت خود بود زین سبب انسان در خلق ترکیب دو جهان بود و موجودی ناشناخته بود. در جهان ماده امواج نور امواج صوت و امواج الکترون ها و نوترون ها و ذرات بنیادی هستی هر یک طول موج خاص خود را شکل داده و در رابطه با ذرات دیگر هستی از آن پیروی مینماید و هر ذره تسلیم و مسلم به کلام یا سیکل حرکت خود است که در ارتباط با عوالم دیگر است و در حرکت و جابجایی و تقابل و تقارن با جهان های دیگر سمت و سو میابد و حرکت در بنیاد و نطفه تنها از آن خداست و امر او و ذات اوست. از جاذبه و سرعت سیر ذرات، برخورد ذرات و چنان که گفتیم افزایش شتاب و سرعت ذرات و در نتیجه شکافت و انفجار و نتیجتا ً ارتعاش و از ارتعاش امواج خلق می گردد، امواج بروز و انتشار دانایی درون دانه یا هسته به سیر پروریدن از شکاف هستی یا شکاف دانه و در سیکل پیوند و پیوست به گسست، و از گشت به واگشت و از رفت به آمد یا دم و بازدم نفس یا اراده ی رحمانی را به آوا گسترده مینمود، نفس رحمانی این موج را به بی نهایت انتشار خود می برد یا به سوی بی نهایت گستردگی انتشار این موج میبرد، پس در هر بازگشتی که میکرد یا بازدمی که می شد این موج به تداخل با امواج میرفت، این نور به انوار می رفت و در این بین خلقت ها از تداخل این امواج و گره های حاصل از آن که در خود انرژی را به دام می انداختند آشکار می شد و به صفت فناگری خالق صورتی در دمی به بازدم و به صورت دیگر تغییر میافت و گوناگونی هستی شکل میگرفت و فناگری سومین صفت خالق بود که بعد از پروردگاری به انجام میرسید. این نه تنها به عالم ماده بلکه در هر سیکل آفرینش خالق و در تمامی امواج و صور جهان های خلقت بود. پس در انفجار ماده ی اول و در نتیجه ی شکل گیری گره های امواج که انرژی را در خود به دام می انداخت بافت انرژی خلقت که این انرژی سرشار آگاهی و بر کلام و موج امر خداوندی استوار بود و در سیر کلام از جهان های دیگر به موالید تبدیل میشد و به این طریق عالم نون و ماده شکل میگرفت. پس خلقت به تنوع به نامحدودی می رفت ولی بی کران نبود و نیست پس در این دم و بازدم که نبض خلقت ایجاد شد مراحل به این صورت بود که انوار، نور، انور – تموج، موج، امواج، ایجاد می گشت. از برخورد موج اول در بازدم یا برگشت آن با موج دیگر که در دم بود امواج تشکیل و هر موج صورت متفاوت به خود می گرفت و معنا و انرژی خاصی را از جهان پنهان به جهان آشکار می ریخت و هر چند آوا یا موج یک کلمه و هر کلمه کلام را تصویر مینمود و هر کلام در طیف و طول موج خاص خود در صفتی از اوصاف هستی هستا، یا بروز و دربردارنده ی معنایی از عوالم مالک یا جهان های دیگر که پیشتر خلقت جهان ماده بودند بود. از لاهوت تا ملک وملکوت و جبروت و ناسوت به اشکال و طیف های گوناگون در کلامی ظهور مینمود و هر یک از آنها و هر شدت و ضعف همچون آواهایی بود که کلام الله بود، کل کرانه های هستی نایی بود در میان که کلام الله در آن دمیده شد و کلام ام کل، یا ام، یا مادر کل، و کلمه الله بود که اسفار سخن را آغاز نموده بود و این در معاد خالق یعنی ماده و در صورت انسان گونه به بیان آواها به روشنی نمایان بود. یعنی نبض خلقت تا بدانجا بود که خلقت ماده هم به معاد خود رسید و این امواج در ذهن انسان به صورت کلام آوا، یا نمود بود موج آگاه و اول، نمایان و خود به عالم صورت حامل آن دانایی دانه ی اول بود و در صفت پروردگاری از آفریدگاری پیشینش، بر وجود آدم به عالم ظاهر نمایان گشت و از کلام، خط به اشکال همان امواج و بر همان معانی و رموزات بر ابزار دست آدم به ترسیمات مدارات نهان گشت و بدین سبب عقل اول به نقل و نقل به نقش رسیده و این یعنی یکی بود که یکتا گشته بود و به میل کثرت تا شده و در همانندی ولی کثرت قرار گرفته بود و گونه گونی در صورت و ظاهر بود.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;اناالحق کشف اسرار است مطلق       به جز حق کیست تا گوید اناالحق ؟&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;اول آوای او ام بود و ام در معنای مادر، خود مادر خلقت بود. به هر حال آوا و موج ام مادر سیکل های حروف و اعداد بود به طوری که این آوا به آواها رفت و این نت به نتها رفت، پس در خلقت، آوای خلقت به آواها رفت و هر آوایی به نشانی نشان شد که هر نشانی ترسیم سیکل های مداراتی بود، در واقع چنان که گفته شد هر آوایی خود به امواج بود که این امواج به تداخل بودند و در این تداخل ترسیماتی شکل گرفتند که حامل آگاهی و انرژی حاصل از آن آگاهی خداوندی بودند. هر ترسیمی به دوایر متقاطع و متداخل، نشان بودند که نمایانگر روابط این امواج در این دم و بازدم بود. به هر ترسیمی نشانی آشکار شد، و این نشانه ها نمایانگر سیمای ترسیمی آن امواج یا آواها بودند، پس این آواها به نشان هایی به نشان آمدند، به طوری که این آوای مرکب، به آواهایی بود که هر آوا به نشانی شد. البته این آوا خود نیز از تداخل آن موج اولی با خود و با دیگر بازتاب های خود یا رفت و برگشت های خود ایجاد میشد که به این طریق این آواها آوای مرکبی از خود نمودار میکردند که مجموعه ی خلقت را پدیدار کردند. پس هر آوایی به نشانی شد که هر نشانی نمایانگر ترسیماتی بود که از سیکل های گوناگون تشکیل میشد که به این سیکل ها در مجموع، سیکل های حروف و اعداد نام گذاشتیم و هر یک از آن آواها را به نشانی نشاندار کردیم که سیکل های دخیل در آن نشان را به اعداد، شمارش کردیم، پس سیکل های حروف و اعداد با هم آفریده شدند یا به آشکاری آمدند.  &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;آدم در درون میهمان روح خدا بود و فرجام یا جام با شکوه روح هستی هستا بود، پس آدمیان بی منشاء هر فکری به خود غره گشتند ولی افکار فانوس کار آدم ریشه در امواج هستی داشت و به دین گونه اندیشه ی آدم در رابطه با امواج کیهانی از موج خلقت و تموج و تموج به امواج و از امواج به استدراک و استدلال و استنباط و استنتاج آدم بدل میگشت پس در وجود آدم خود خواند خدا و خدا به خود آمد و بر آزمونگاه خلقت خود نگریست و نتیجه ی خلقت امواج را به هفت مرحله و هفت روز خلقت دید. اقرا بسم ربک اللذی خلق یا امر خواندن به نام خدا را بر آن کس حکم بود که آگاه بر نای میان و درهنجار وحدت وجود در رابطه ی با امواج بود. پس از غار یا نای میان خود خواند حکم زمان خویشتن را و قر – آن را خواندن آن یا زمان نام نهاد ( قر = اقرا و آن یعنی زمان ) و به دین سبب اول یار او اعلا علی نیز خود را قرآن نمود و بر زمان خویشتن نهج البلاغه را آشکار نمود و گفت که قرآن ناطق است، و خود قرآن ناطق است. ولی کفاری که کلام پیشین وسیله ی حکومتشان گشته بود در مقابل او ایستاده و قرآن کاغذ و مرکب را بر سر نیزه ها زدند چراکه معنای آن را نیافته بودند و در نابهنجاری و عدم تعادل در امواج ذهن خویش به سبب نابهنجاری تن و روانشان شیطنت و انحراف را پیشه ساختند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;اینها همه نمایان بر آدم از دری بود که پارسی دری بود و در آن واقع بود و خالق به سبب آن در را بر انسان کامل به عالم معنا میگشود و خود معنا بود و به این سبب ایران سرزمین خدا بود. سه ره برای یافتن آن پارسی و معنای آن پارسی سره بود. کنون گردان به برگردان و لحظه ی معاد ماده و فارق التحصیلی میر مالک از دانشکده ی انشاء عالم تن یا ماده و روان یا سرعت بی جرم جهان رسیده و هر گام میر مالک انتخاب و تحصیلی است برای فرمانی دیگر، اینجاست که فرمودند بگویید : ای مردگان، دست بخشش یزدانی آب زندگانی میدهد، بشتابید و بنوشید، هرکه امروز زنده شد هرگز نمیرد و هر که امروز بمیرد هرگز زندگی نیابد... . کان کفو توان راز شتاب قیامت عالم با قرار دادن متناسب وجود مبارک آدم در میدانها و مدارات انرژی و امواج کهکشانها راه به هنجار آمدن انرژی و افکار آدم را میسر و او را میهمان سوالات و افکار و الهامات والا و روشن بینی ها و خود آئی ها میسازد. هنجار انرژی تن گر با توجه و تمرکز بر امواج مغزی و سلسله اعصاب و نتیجه ی آن افکار صورت پذیرد منجر به ساختن انسان اندیشمند و و بینشمند میشود و این رازی است در طریقت دانایان نهفته و خود اعجازی است بر تارک وجود آدمیان. پس چون خدا به خود رسد اشد اشتاب قیامت عالم فرا میرسد و قیمت آدم بر خود نمایان میگردد و قیام به حق از رستاخیز تن و روان میکند و آهنگ یگانگی را میسراید و خود را با خالقش یگانه میبیند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;تو خود حجاب خودی        حافظ، از میان برخیز&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;.............................................................&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;از ره غفلت به گدایی رسی       گر به خود آئی به خدائی رسی&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;...................................................................................&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;من عرفه ربه فقد عرفه نفسه&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;...........................................&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;حروف صور علمیه ی خداوندی میباشند که به واسطه ی آنها و به همراهی اعداد آنچه را که او از خود میداند، در تصور الهی به کل و جزء می آورند، به واسطه ی حروف آگاهی به خلق خلقت می آید و به اعداد آن خلق به خلایق و کثرت میرود. زبان عبرانی زبان علوم تاریکی و ناسوت است تا به ملک، و زبان عربی زبان ناسوت و ملک است تا ملکوت و زبان پارسی سره زبان علوم عالم روشنایی می باشد تا به جبروت. مبنای وهم یا تصور، حروف و اعداد است، حروف حامل آگاهی هستند و اعداد بعد تکثیراتی آن معنا می باشند. فضا در سه بعد تعریف می شود و زمان بعد چهارم آن است، اما زمان خود در گذشته حال و آینده تعریف میشود، پس زمان و مکان شش بعد دارند. در بعد پنجم زمان – مکان سیکل های حروف می باشد. هر حرفی ترسیم خاص خود را دارد که در چهارمین مرحله از ده مرحله انسان مربوط به این سیکل ها می باشد. سیکل های حروف و اعداد در واقع با هم و در هم هستند و هر دو از سیکل های ترسیمی کلمه ای دو سویه جمالی و جلالی می باشند. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;
&lt;HR&gt;

&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;(( از همراهان دعوت میشود برای مطالعه و کسب آگاهی بیشتر در زمینه ی اسرار حروف و کلام به کتاب عرفان مایگاهی ( اسرارالحروف ) نوشته ی آقای محمود مدیر روستا مراجعه نمایند. جملاتی در بخش پایانی این مقاله از کتاب اسرارالحروف نوشته ی این دوست و همراه بزرگوار در جهت استفاده ی همراهان در این مقاله به کار برده شد که امید است موجب رنجش خاطر این بزرگوار نگردد و در صورت دیدن این صفحات ابراز نظر بفرمایند تا اگر مقبول ایشان و صاحب حقیقی آن علوم، دانای دانایان یارومه راهبر جان ابراهیم زمان و صاحب حکم کلام واقع نگشت نسبت به حذف آن جملات به حق و مبارک از این مقاله اقدام نمایم )).&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
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&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;قسم به آسمان و زمین که انسانها در ضرر و زیانند، آری انسان سرگشته و آشفته ی عصر ما در نابهنجاری روان و چه بسیار سوالات بی جواب که بودن وی را رو به نابودی نهاده، دوست را دشمن و دشمن را دوست خویش میپندارد و بی تامل قضاوت و بی جستجو پاسخ خویشتن میابد. اصولا نباید فراموش شود که دانش و دانایی انسان باید برای ارتقاء و انشاء وجود آدمیان به کار گرفته شود و گر جز این باشد هر دانشی را چون دانه ای است که به سنگ خارا می افتد و بار و ثمر نمیدهد. اینجاست که دانه ی دانایی نیاز به بستر و شرایط بروز میابد و بر ادراک کنندگان آن حقیقت و دانش و دانایان واجب میگردد که از اجتماع خود جدا نگردند و مسئولیت بیشتری در جهت ساختن زندگانی راستین و نجات انسانها بر دوش کشند، جهان ما پر از بیدادگری و تاراج است، پر از فریب و نیرنگ است و اندیشه ی آدم ناکامل و غافل از خویشتن است، چه بسیار انسانهایی که به یک لقمه نان شب شکر گذارند و همزمان چه بسیارند حاکمانی که به شیطنت کودکانه ای در زمین مشغولند و با تسلیحات کشتار جمعی خود حیات زمین و آدمیان را به بازی گرفته اند. این حقیقتی است روشن که برای ایستادگی در مقابل آن، و تصمیم به همراهی مردان و زنان رزمنده ی راه دانایان و ایستادگی در مقابل این نابهنجاری ها نیاز به گفتار بیشتر و اثبات حقانیت از سوی همراهان طریقت دانایی نیست و شک برخی انسانها بر دلیرمردان دوران و اندیشمندان و نو آوران تنها حاصل ضعف و زبونی کنونی بشر است و ترس حاصل این ضعف است و ترس عامل فساد اندیشه ها و تنها عامل چشم پوشی از حقایق است. آری برای همراهی انسانها و خواندن پیام پیام آوران نیکی و یکتا پرستی بر دیگر آدمیان تنها کافی است که بدانیم و بخوانیم که : بنی آدم اعضای یک پیکرند .... که در آفرینش ز یک گوهرند ... چو عضوی به درد آورد روزگار .... دگر عضوها را نماند قرار .... تو کز محنت دیگران بی غمی .... نشاید که نامت نهند آدمی ....... .&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;انسان امروز در پایگاه اندیشه ی علمی و در اندیشه ی علمی تحمیل عقاید در بین نیست بلکه شرط حرکت داشتن قابلیت تحلیل منطقی است. حال از این پایگاه که پایگاه خود را پیوسته به تمام ابعاد وجودی انسانها میدانیم که اندیشه ی علمی یکی از این ابعاد است اعلام میداریم که گر سوالی هست آماده به پاسخ گویی هستیم و گر سیاست مدارانی هستند که به این نیروی عظیم ایمان به حق و همچنین جبر تکامل تاریخی که پشتوانه ی حرکت انسانی ماست اعتقاد ندارند و خود و حکومت ننگشان را جاودان میپندارند گر ادعای حقانیت و بیانی دارند بیایند و در همین مکانها که اندیشه های ما ثبت است گر توان آن را دارند به مناظره با ما بپردازند و گر چنین نیست با تحمیل عقاید و مانع شدن از حرکت انسانی انسانها و سعی در فریب آنها در پشت تریبون های یک سویه ی خود، خود را بیش از این در منجلاب نادانی و خیانت به بشریت فرو نکنند و بیش از این منفور آیندگان روشن اندیش و خالق هستی بخش نگردند. این لحظه زمان انقلاب واقعی بشریت است و این انقلاب با شناساندن راه نوین ایجاد نظم اجتماعی با توان علم حق و عدالت و یگانگی انسانها در راه است و هیچ نیرویی را یارای ایستادگی در مقابل خواست مشترک انسانها و خداوند هستی بخش نیست. حقیقت، امروز دیگر پنهان نیست و هرگونه پس روی و کوتاهی در آغاز مبارزه ای انسانی نابخشودنی است. گر پیر زمان توان داد بر جسم و روح و اندیشه ی آدمیان و فرمان داد بر صلح و یگانگی انسانها و خواند رمز و راز انرژی روان و توحید و وحدت آدمیان به هنجار انرژی روان و خنده ای تلخ و خروشی نمود بر جهل جاهلان زمان و نابود کنندگان انسان که چون روزگار باستان اما با ابزاری نوین هنوز به جنگ و جهل خود پا میفشارند و به صبرش ثمر بر اندیشه ی انسانها نشاند و راه نوین نجات را نمایاند، دیگر نپیوستن و نیندیشیدن بر راه او و شک بر نیاز واقعی بشر که بی شک خود او که یگانه منجی است و یگانه امام به حق حاضر در زمان حاصل خیال شوم دولت مردان در غصب اموال آدمیان و فریب آنان و کمکی ناخواسته به برقراری حاکمیت شیطان است. آیا ما خود میخواهیم که حاکم باشیم ؟ ما در پایگاه فعالیت های بشر دوستانه ی خود بارها اعلام داشته ایم که هیچ حکومتی را قبول نداریم حتی اگر روزی خود حاکم باشیم باطل و محکوم اندیشه ی خویشتن هستیم. ما خواهان حکومت یگانه حاکم خداوند قدوس و مهربان و خواندن بالاترین کتاب آفرینش آن یعنی انسان و بررسی مسائل انسان بر پایه ی اندیشه ی اندیشمندان زمان و برنامه ریزی بر پایه ی آن در اجتماع انسان هستیم و جدال انسان با انسان را حاصل جهل آدمیان میدانیم و میخواهیم از آن جلوگیری کنیم ولی به جبر زمان و برای درک مسائل انسان خود را به آن مسئول و متعهد نموده ایم. بر ماست که هوشیار باشیم و با نخوابیدن و مبارزه ای دائمی در پایگاه های اجتماعی خود این خائنان حیات انسان و سیاست مداران منافق با انسان را به تسلیم و سقوط بکشانیم تا شان آدم حفظ گردد و به یاری یگانه انسان کامل یا منجی آدمیان که در کمال بر قضاوت دوران خواهد رفت نجات بخش خود و همه ی انسانها باشیم. بی شک پشتوانه ی ما در همه ی ابعاد اجتماعی و فرهنگی و اقتصادی به کار گیری قدرت انسانهاست و یگانگی و اتحاد و وحدت آدمیان در جهانی دمکراتیک تضمین کننده ی پیروزی و خواست مشترک همه ی انسانهاست. به امید آن روز و تا آن روز شکوه مند و دوران ساز و فرا رسیدن انقلاب بی مرزها ثانیه شماری میکنیم و در اندیشه و تکاپوی این راه مقدس ایستاده ایم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;
&lt;HR&gt;

&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=ltr align=center&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT style=&quot;BACKGROUND-COLOR: #ffffff&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;&lt;B&gt;حاكم زمين (خدا) خودا شد&lt;/B&gt;&lt;B&gt;&lt;/B&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;م الله&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;ا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;دم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;بر خاک دماند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;اهريمن زاتش&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;وجود آدم مهياشد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;آتش بر آدم شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و آدم آتش افروزان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و نار نون ز ارحر بدر شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;سيال سيار سرگردان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;آدم رويگردان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;ز خود يابى&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;ز خود جويى&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;نافرمان شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;خدا سماء&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;خودا ارض شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و چنين خداى حاكم بر زمين و زمان شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;يک به معناى سر آغاز پيدايش زمان و كيان است و يک احد ز احديت يكتا سرشته شد و از روح خود در آن يک دميد و از وجود حى الوجود بوجود شد پس كيان بر او شناخته نبود و خصلت مخلوقات بر او جيره شد انديشه اش بارور گشت و در (حى = وجود زنده ) و ( آن = زمان ) انديشه كرد و آن سان شد ( اشرف مخلوقات ) و بر زمين امانتدار روح دميده از حى الوجود در كالبد تن خويش شد و براى هميشه وارث زمين و زمان شد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;  
&lt;HR&gt;
&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;اب راهی میم و میم هدایت بر انسان شد و مکمل هدایت مهدی نام شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;پس میم بر هدی، مهدی شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;  
&lt;HR&gt;
&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;دانش را اهلی است، ایمان را مراتبی، و دانشان و دانشیان را تجاربی.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و دانش دوگانه دانشی است : فروهشتنی و فراگرفتنی.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و دریا دوگانه دریایی است : بر نشستنی و نا گذشتنی.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و زمان دوگانه روزانی : گجسته پای و خجسته پی.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و مردم دوگونه مردمی : بخت یار و ربوده بخت.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;پس بشنوی به دل، تا چه گوید این یکدله یار :&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;و بنگری به فهم، که موهبتی است خود باز شناختن. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;بر آمدم به کوهی بی پای، که پایگاهی دارد غیر مرا دشوار، و در آمدم به دریایی، و غرقه نشد پایم، لیک غرقه شد جانم، و این هوای دلم بود، چراکه ریگهای آن هر یکان گوهری است نه به دستی سوده، لیک به تاراج فهم ها رفته. از آن آب سیر نوشیدم و بی دهان، اگر چند شرب آن آب دهان می طلبید، چرا که جان من هم از ازل بدو عطشان بود و اندامهای من بدو آغشته، هم از این پیش تا به هم پیوندند. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;من یتیمم، و مرا پدری است که بدو میپناهم و این دل از غیبت وی تا زنده ام به غم فروست. نابینایی بینایم، نادانی دانایم، و اینک سخنان من که هرگاه بخواهم، وارون میگردد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;همدلانی دانای آنچه دانسته ام، مرا یارانند، که یارانی هست هرکه را که بارور از نیکی هاست. جان اینان به عالم ذر آشنای هم بوده است، پس آفتاب کردند هم به گاهی که زمان غروب میکرد.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;تا نبوت شعائی از نور است&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;وحی آن در چراغ تامور است.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;در من این چیست میدمی، جان نیست –&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;الله الله که نفخه ی صور است !&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;چون در آیی ز طور من به سخن،&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;FONT color=#cc6633 size=3&gt;من نیم، موسی است و بر طور است.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;
&lt;HR&gt;

&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=left&gt;&lt;FONT color=#cc6633&gt;نوشته ی همراه کوچکتان کامرون&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 20 Sep 2008 09:35:18 GMT</pubDate>
<comments>http://commenting.blogfa.com/?blogid=yeganehagh&amp;postid=16</comments>
<dc:creator>yeganehagh</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>پیام</title>
<link>http://yeganehagh.blogfa.com/post-15.aspx</link>
<description>&lt;DIV align=center&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/DIV&gt;
&lt;DIV align=center&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/DIV&gt;
&lt;DIV align=center&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;اهورا مردمی آزاده بودیم  &lt;BR&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;به جانبازی همه آماده بودیم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;سراسر خاک ما سر سبز و زیبا &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;کویر و کوه وصحرایش فریبا &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;به باغ سبز ایران گرم بودیم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;دل عالم به زیبایی ربودیم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;ز حال ما چه می پرسی که چون شد &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;دل از نامردمی ها غرق خون شد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;ریا کاران چو از ما یاد کردند &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;برادر خواندگی فریاد کردند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;گشودیم از کرم در را به ایشان &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;پذیرفتیمشان مانند خویشان&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;برادر خوانده ها بیداد کردند &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;ستم بر ما به نام داد کردند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;دمی از ریشه ی میهن گسستیم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt; &lt;BR&gt;به زیره سایه ی غفلت نشستیم &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;به خوابی خوش وطن از یاد بردیم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;رنگین باغ میهن را از یاد بردیم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;جلادان در هجومی سخت سنگین &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;جویدند از ولع این باغ رنگین&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;جویدند آنچنان افکار ما را &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;که گم کردیم هم خود هم خدا را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;خدا در ما و ما گرد جهانیم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;به دنبالش به هر سویی روانیم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;جویدند آنچنان ما را ز ریشه &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;که سوزد شاخ وبرگ ما همیشه&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;هلا خاتون مهر ای عشق پرور &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;بیا وچادر مهرت بگستر&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;شتابی کن که جانی تازه گیریم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;به سبزی در جهان آواز گیریم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt; &lt;BR&gt;سراسر ریشه ی ما در خاک عشقت &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt; &lt;BR&gt;نفسهامان هوای پاک عشقت &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;کنون در این لحظات بر همه ی ایرانیان و بالاخص جوانان واجب است که فرهنگ جاودانه ی ایران زمین را بشناسند و آن را به درک دیگران نیز بنشانند تا رهایی ایران از چنگال ظالمان زمان و ملایان شیطان هرچه سریعتر صورت پذیرد. دیده شد که چگونه ملایان نادان ادیان با ترویج خرافات با نام دین در میان توده ی مردم ستمدیده بر آنان حاکمیت یافته و ثروتهای فرهنگی و ملی آنان را به تاراج و نابودی بردند. در این لحظات که همه ی آدمیان گرفتار آمده در زمان و هستی و نیستی بازیگران و سیاستمداران دوران خسته و درمانده و ناامید به انتظار راه نجات و منجی آخرین نشسته اند بر ملت ایران واجب است که با درک آرمان نیاکان روشن اندیش و اهورا منش خود آنچنان که انتظار میرود رهایی بخش خود و همه ی آدمیان از چنگال ظالمان زمان گردند تا افکار خرافی و سست ضعف های ترویج یافته در اندیشه ها، آنها را بی جهت به نیستی نکشاند و هرچه سریعتر این لکه های ننگ که خود را با نام دین و سیاست بر آدمها غالب نموده اند از پیکره ی اجتماع زدوده شوند. و این میسر نیست مگر با درک ذات و فلسفه ی ادیان و منجی انسان با قوت اندیشه ی آدمیان، و این یعنی دست یابی به انسانهای حقیقی یا منجیان آدمیان. (( تو کز محنت دیگران بی غمی ... نشاید که نامت نهند آدمی )) (( هر آدم خود نگاهبان آفرینش به سپندار آتش وجود (نگاهبان یعنی منجی) و هر آدم زاویه ی خود با خدا دارد )). نیاکان روشن اندیش ما و همه ی منجیان زمان ها و ملل، بالاخص در آئین پاک زرتشت پیامبر، همواره بر منجی و نجات بخش آدمیان تاکید داشتند و از آن سخن ها سرودند. اما سخنان آنها به هیچ رو (( چنان که پیشتر در مقالات (مهدی کیست)، بیان داشتیم و در آینده هم با مستندات بیشتر بیان خواهیم داشت )) شباهتی به منجیی که ملایان و بازیگران ادیان و فریب خوردگانشان از آن سخن میگویند نداشته و ندارد. چراکه ملایان بی دین و دانش همواره کوشیده اند تا با سرگرم کردن مردم و سر به چاه و چاله فروبردن آنان بر آنها حکومت نمایند و با ترویج خرافات، خود را مومن و دیندار جلوه دهند و مردم را در انتظار اوهام خویش ساکت و مهار بنشانند و بگردانند و با خیالی راحت از این باب که عده ای فریب خورده دارند همواره به ظلم و ستمشان ادامه دهند. کنون بر همه ی جوانان این سرزمین واجب است که با شناخت خود به درک خدا روند و با شعار نیاکانشان و با یاری اهورا مزدای پاکی آفرین و تنها نجات بخش این سرزمین هر یک خود منجی و رهایی بخش ایران به قوت مشت های متحد و دست های در هم تنیده ی خویش شوند. سوشیانت در آئین پاک و مهربان زرتشت پیامبر یک شخص نیست بلکه فرهنگ رهایی است فرهنگی است که نیاکان ما آن را برای تضمین آینده ی سرزمینشان بنا نهادند تا ستمگران همواره بدانند که این سرزمین قابل تسخیر جاودانه نیست چراکه ایران سرزمین آزادگان و هر انسان آزاده خود سوشیانت است و سوشیانت در دین ایران سمبلی برای یاد آوری روز جزا و نهیب به بدیهاست و هر ایرانی با درک آئین ایرانی خود سوشیانت زمان و باید که برای رهائی و زنده نگاه داشتن فرهنگ جاودانه ی ایران زمین کوشا باشد. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;این درک آدمیان از معنا و حضور منجی همان کاووسی است که ملایان ادیان از آن شدیدا ً بیمناکند و بدین سبب دیده میشود که اخیرا ً با ساختن برنامه هایی همچون (مدعیان دروغین) و (در انتظار ظهور) و سایت های اینترنتی مهدویت به صورتی گسترده از سویی، و از سوی دیگر با تولید و رواج افراد دزد و شیاد و خرافه باف در جامعه که با برنامه های از پیش مشخص شده ی خودشان و ابزارهای خاص ملایان و با فرمان ایشان خود را با ادعاهایی مشابه ولی بیراهه برنده و با نام مدعی ارتباط با منجی و یا منجی بودن در بین مردم شناسسانده و سپس به آنها خسارت وارد می آورند تا از این طریق ملایان بتوانند در اذهان عمومی هر گردی را گردو نمایند !!! و اذهان آدمیان را در مقابل اندیشیدن بیشتر در باب منجی و مدعیان راستین و اندیشمندان زمان و عرفای حقیقی و دین شناسان راستین واکسیناسیون نمایند تا بلکه راه پذیرش آنان را از سوی مردم ناآگاه و راه نجات مردم را از زیر یوغ خرافات ملایان ببندند و خود را برحق و منتظر ظهور بر پایگاه خرافات شیطانیشان نمایش دهند تا بلکه بار دیگر سالها سرها را در چاه ها و در انتظار فرج فرو کنند. ما در پایگاه یگانگی انسانها آنها را توانا میدانیم و میخواهیم، و معتقدیم که منجی هر انسان از جهل و گرفتاریهای دوران خود، چیزی نیست جز اندیشه و دانایی انسان و راه آن را بر پایگاه طریقت دانایان بر ارتقاء و انشاء تن و روان نشان و جوانان را به سوی فتح این برتری های انسانی، روان میکنیم و دست یاری به سوی حق جویان دراز و آنان را به سوی خود میخوانیم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;پس ای هم رزم ای ایرانی این بدان که با خود آیی و پیوستن قلبت با اهورا مزدای پاکی آفرین و درک آرمان آن و شناخت فلسفه ی ادیان و درک آن، تو خود خدایی و منجی بر آدمیان.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;بیایید با درک اندیشمندان دوران و گرفتن دست آنان رهایی بخش خود و ایران باشیم از جهل حاکمان ننگین امروزمان و ببندیم راه بر اهریمنان. &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;تنها اندیشه ی رهایی بخش و وحدت آفرین انسان طریقت دانایان و نگین سرزمین آریان و گفتار نیک پندار نیک و کردار نیک تنها شعارمان.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;من خود منجی میگردم بر آدمیان، تو خود منجی میگردی بر آدمیان با نجات ذهنمان از بن بست های فکری و شجاعت در اندیشه به هر کران از جهان بی کران انسان... .&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;ایرانی و جوان پاک سرزمینم سر ما انسانها خود زمین خداست و پر از سر و اسرار نهان، و سرزمین به این معنا است و ما خود با شناخت خویشتن پیام آوران نیکی و سوشیانت زمان خواهیم بود. بیایید دست در دست هم دهیم و برخیزیم به راه احقاق حقوق و نشان دادن حق و بطلان ناحق، آنگاه همه برخیزند و ما پیروزیم چون قانونمان قانون انسانهاست. سوشیانت های ایران نام بر خود بکشید و بپا خیزید که فریادتان پایه های سست حاکمان زورگو و عوام فریب را در هم فرو خواهد ریخت. اهورای پاک پشت و پناهتان. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT color=#0066ff size=3&gt;ما باید در نبردی آگاهانه و با توجه به تمام امکانات موجودمان برخیزیم و از هیچ مسئله ای غافل نباشیم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;در این راستا و در جهت آگاهی بخشی به هم میهنان به زودی در این قسمت از وبلاگ به افشای حرکت های منحرف کننده ی اندیشه ها که از سوی جمهوری ننگ نا مردمان و در جهت بی اعتبار نمودن اندیشمندان و منجیان ایران صورت میپذیرد خواهیم پرداخت تا همراهان و ایرانیان عزیز هوشیار باشند و به سادگی فریب این مکاران و آدم فریبان زمان را نخورند. استفاده و تکثیر مطالب این وبلاگ بدون دخل و تصرف در متن آنها کاملا ً بلامانع است و از این امر در جهت آگاهی رسانی به همه ی هم میهنان استقبال میکنیم. از همه ی ایرانیان می خواهیم تا با قرار دادن آدرس این وبلاگ در تمام صفحات و سایت هایی که میشناسند ما را در جهت دست یابی به اهداف انسانیمان یاری رسانند. ( این حد اقل کاری است که برای رهایی ایران میتوانیم به آسانی انجام دهیم و یکدیگر را یاری دهیم ) به امید دست یابی به ایرانی آزاد و امن و انسانی سربلند و پرشکوه.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;ملایان شیطان بترسند از آن روزی که هر جوان ما با خود باوری خود سوشیانت ایران زمین گردد و مسئولیت رهایی انسانها را بر دوش خود احساس کند.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;از هم میهنان مقیم در خارج از ایران جهت ایجاد کمپینگ های سازمان یگانگی و برپایی مراسم و اجلاس های شناخت سوشیانت و راه یگانگی انسان در خارج از ایران دعوت به همکاری و همیاری میشود. لطفا ً در این جهت با ایمیل سازمان تماس حاصل نموده و با بیان تخصص و امکاناتتان آمادگی خود را اعلام نمایید تا راهنمایی های لازم برای شما ارسال گردد. &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT color=#0066ff&gt;کامرون نام &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;</description>
<pubDate>Thu, 14 Aug 2008 18:24:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>yeganehagh</dc:creator>
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<item>
<title>امام زمان کیست ؟</title>
<link>http://yeganehagh.blogfa.com/post-14.aspx</link>
<description>&lt;DIV class=hide style=&quot;PADDING-RIGHT: 8px; PADDING-LEFT: 8px; BACKGROUND: #ffffcc; PADDING-BOTTOM: 4px; PADDING-TOP: 4px; BORDER-BOTTOM: #eeeeee thin solid; FONT-FAMILY: Arial,sans-serif&quot; align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=5&gt;مهدی کیست ؟ (2) &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV style=&quot;MARGIN: 1ex&quot;&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الف لام میم – امام - الف میم الله میم – الف لا میم و میم، رمز قرآن المسلمین. المیم حمد موسی مریم مسیح محمد مهدی. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;م&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الله&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;میم &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الله نور السماوات والارض &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;خداوند روشنایی آفرید و دید که نیکوست ! پس دید نیکوست و دیدن نعمت امر اوست. فتبارک الله احسن الخالقین ..&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;خداوند توان دید است و دید نیکوست و نور در آیه ی شریفه ی فوق معنا در توان دیدن و ادراک و توان راه یابی و نه نور عالم جسمانیه ی اوست.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;نور، عقل و اندیشه و در وجود آدم روح و روح همانا از اوست پس آدم نور دانایی در درون و هر آدم پرتوی از انوار اوست. او شب را از برای روز و روز را از برای شب آفرید تا بدین تضاد بتوان نور و روشنایی را شناخت و نور را دید و دید نیکوست و از آن اوست و این تنها راه بصیرت خود بر خود بود ... . &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;دید دال بر ید و دانائی، دست خدا در وجود عالم موجود و آن ید در دانه و ذرات هستی و هدایت گر و راهبر وجود است. ( پرورش دهنده و پروردگار از این رو خوانند بر کردگار و آنکس که به شناخت و ادراک اوست در دستان اوست ) ( عیسی مسیح (ع) : زین پس بر دست راست خداوند خدای خواهم نشست ). &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;پس آن نور در دل تاریک دانه راه کمال را نمایان و بر آن ره گشود و کشتزار زمین را پر رونق نمود. نور در ژن موجودات جان کمال عالم جسمانیه را در آدم نماها ( نئاندرتال ) نشان و آنان را روان به سوی تکامل جان و روان نمود. یکی انسان بود تشنه به عالم تن ...  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;نور خود روان و در عالم روان کلام بود و کلام خود روان بود و کلام آگاهی و آگاهی، خدا و خدا از روح خود در آدم دمید و هو هو دمیدن او و هو نام او ( یهو – یا هو – هو – او ) زین پس خدا با آدم بود و خدا آدم بود، دمیدن دال بر دم یا لحظه ای بود، پس لحظه ی پس از دم، بازدم بود و این آمدن و رفتن و انالله و انا الیه راجعون را در دم واقع میکرد این رمز حیات و آیین ین و یانگ یا یم می و اسفار خالق بر زمان بود که بر شش شش وجود آدم واقع بود و خدا با آدم بود. ملائک آدم را سجده کردند چراکه امر به سجده ی آدم همان سجده به حق خداوند خدا بود و خدا با آدم بود، نادان و آنکس که آدم را از خدا جدا پنداشت شیطان دو عالمین گشت و سرکش از فرمان خداوند خدا بود و رانده شده ز درگاه او چون آدم را سجده نکرده بود. آدم زین پس در معنای آدم و آگاه ولی ناخود آگاه به حضور غیب خدا و عالم غیب کلام بر وجودش و نابینا بر بین و میان و نور درون بود چون چشم آدم به عالم برون بود پس فرصت فریب از آن شیطان به وسوسه های عالم برون بود.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;بینابین، امر به دیدن الف میان بینابین یا بین آ بین و یا بین آی میان به معنای بینا گشتن یا دیدن آ بود ( بینا – بین ا -  ببین آ ) و نابینا آن بود که نمیدید بین یا میان آدم آ یا خدا را ( نا بین آ ). از این رو عیسی مسیح (ع) فرمود : ملکوت خدا نه در دورها و نه در نزدیکی هاست آن در میان شماست چراکه او بینا بود. ملکت ملکوت ... خداوند خدا گفت که شیاطین همه کورند و کرند، پس نابینا نا دیده بر بین و آ و غافل از میان، و آدمیان : الف دم یان که دم نفس است و نفس نفس و یان کهن نام انسان و یا به تعبیر دیگر : آدمیان، الف دال بر میان یا همان الف لام میم و حجت وجود الف یا آغاز در میان و خدا آدمیان را بیانی آشکار است. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;نور عالم پنهان در درون کلام و کلام میهمان انسان و انسان میهمان کلام و کلام وسیله ی اندیشه و خود سرشار از اندیشه ی جهان بود. نور عالم برون تابش از ستارگان و آسمان و زمین و رویت آن آسان چون چشم باز گشوده شده بر برون و برون دیده از نور رب حاصل ولی درون نور دال و اندیشه و خود آئی کلام بر خود را طلب و دشوار و زین سبب بسی تاریکی ها در انوار برون از جهل و نابینایی درون رخ نمود. یکی انسان بود تشنه به عالم بودن .... &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;مسلمیت و تسلیم حکم اول روز خلقت بر ماده ی معاد خالق بود و هر ذره راه خدا را انجام مینمود و هیچ چیز از خدا جدا نبود. پس هر ذره در جای خود بود و یکی دست و یکی پا و یکی چشم و یکی ستاره ی سوزان بود و اعتراضی هم نبود.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;تجلی کلام از راه میان بر آدم نمایانگر اوصاف خدایی و آدم چون خدا به اختیاری که توان کلام بر او بخشیده بود ولی غافل از احوال عالم و درون و هر آدم خود غایتی گشته بود از برای خویشتن و نابینایی بود بر آدم از این رو فرموده گشت که دست بر درخت میان نبرید که عارف نیک و بد نیستید !!! اما نابینای اول دست آدم گرفت و وسوسه بر آدم حکم نمود چون بینا بر عالم برون بود پس آدم دست بر درخت میان برد چون خود نابینا ی درون گشته بود و از خود و میان خود غافل بود و آنگاه دم بازدم و آ پنهان از دید آدم و این اجازت به سبب حکمت آزمون اندک اختیار آدم بود. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;جهان مسلم و تسلیم بود اما نور اندیشه ی پنهان از دید آدم خارج و خدا نادیدنی بود بلکه فهمیدنی بود و فهمیدن دیدن اندیشه ی آدم بود و آن دیدن دیدنی راستین بود ولی در بشر نبود. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;بدین سبب خداوندی که شب را از برای روز آفریده بود چون نیاز دیده شدن بود و دید خدا بود پرتو ادیان را در زمان جهالت بر آدمیان نمایان نمود و آن نیاز دوران جهالت بود. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;خداوند اول قانون گذار و تنها قانون گذار عالم بود و قوانین او عادلانه و بر همه یکسان بود حتی بر خود که خدا بود هم قوانین خود را متحمل مینمود و قوانین آفرینش را وضع مینمود و خود اول مجری آن قوانین بود، پس طبق قانون خود به اضداد عالم کلام را خواند بر پیامبرانش که شب و روز را یکسان به آدم دهند و نیکی و بدی را در کتاب مادی بر ماده ی عالم به دست و زبان پیامبرانش ثبت مینمود اما حکم آدم یافتن نیکی ها بود و فرارفتن از اضداد دوگانه و واحد و احد را شناختن تنها از دل اضداد میسر بود. از این رو حکم اندیشه بر عبادت مقدم و ترجیح بود و عبادت را متوجه ی اندیشه مینمود و کتب تنها، راهنمای آدم بود و آدم خود بالاترین کتاب آفرینش و خود خواندن شایسته و بایسته بود، ( اقرا بسم ربک اللذی خلق ). آدم در ذات تسلیم بود و مسلمیت بر کتاب نبود و کتاب که نباید بت آدم مینمود، چون آن کتب که به عالم رسالت آمده بود به عالم اضداد بود و در معنای کتاب یا کت اب یا دست خدا نبود و کلامی اللهی اما بر دست آدم بود و دست خدا در درون آدم بود. ( آن خلیل بنا کرد و این خدای خلیل ) پس گاه وسیله ای برای حکومت و گاه حکمت و نور و گاه محل سوء استفاده و بر سر نیزه زدنها و نمایش ها گشته بود و آدم غافل و نابینا از اندیشه ی کتاب و نور دانایی در خود و آن بود.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;خداوند خدا بر طفل اندیشه ی آدم که سر به سرکشی و نتیجتا ً سر و یا راز کشی و بی معنایی نهاده بود، به زبان قصص سخن و در قصص معنا و در معنا قصص را نهاده بود اما اسرار و نور کلام بر آدم نابینا پنهان و آدم به قصه خوانی پرداخته بود و گاها ً بر آن ظواهر امر خود را تسلیم و در واقع هرگز مسلم نبود. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;در کمال کاستی و در کاستی کمال بود و در سوره ها نور هدایت و گاها ً در همان سوره ها ظلمات جهالت بود و این غالبا ً از حدود تنگ اندیشه ی آدم بود. ( در زمان خود هدایت و در زمان دیگر جهالت، چون کلام بی زمان و بر همه ی زمانها بود اما زمان تنها در درک آدم و صبر خالق بر بلوغ اندیشه ی آدم بود از این رو حکم به فرزند زمان خویشتن گشتن بود و در زمان به نور اندیشه ی خود از کلام ادراک بردن نیک مینمود ) اما آن نیک و بد، نیک زمان خود بر بینایان و نیاز و نیاز حکم زمان بر آدم بود، اما همان کلام به زمان خود در دست نابینایان هم بود و بدین جهت دید بر آدم نکو بود و توان دید دانایی عالم آدم و کمال اندیشه و ظهور خدا بر دیدگان اندیشه به یافتن عالم معنا و معنا خود خدا بود. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;از پس هر زایش میرش بود و از پس هر میرش زایش و از پس هر آیه ای آیات و از پی هر کتابی کتب و از پس هر پیام آوری پیام آور دیگر پس هر کتابی کاف و شکافی بر بتک یا کتب پیشین بود و از این رو مقاومت بت پرستان و جنگ مذاهب بر نابینایان پیشه بود و حکم هر رسول همان بت شکنی و کار او بتهای زمان خود شکستن بود. توان و وسیله ی شکستن بتها و بتک ها یا همان کتب ها و ایجاد شکاف و کاف میان آنها برای یافتن و ظهور معنایی در درون آنها و نمایاندن نور بر آدمیان کت اب یا دست خدا بود که خود را به شکل کتابی جدید رخ مینمود و دست خدا بالاترین دست ها بود اما آدم غافل از این معنا بود و از این رو علی (ع) دست خدا در برابر کتاب پرستان و خود قرآن ناطق بود و کتاب جدید نهج البلاغه را از شکاف قرآن نمایان نمود اما آن هم به عالم زمان و اضداد بود پس کلام آخر نبود. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;کتب آسمانی وارونه بر اندیشه ی آدم بتک یا همان بت کوچک و هر بت شکن خود بت زمان بعدی بود چون نور آیات پنهان و کتاب در دست و نه در درک اندیشه ی آدمیان زمان بود.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;تورات ، راتو و راه تو به سوی قاف و قاف ران، ق ران، قرآن فرجام و از شکاف تورات، انجیل و از شکاف انجیل قرآن و هدف از ادیان رسیدن به خاتم و نشان دادن نور برای دیدن راه قله ی قاف بود اما آدم غافل از آنکه هر راه چشمه های جوشان و گوارا و سنگ خارا و صخره و دره و خار و پرتگاه هم دارد و رسیدن به قله نیاز به دید و توان دارد و دید که نیکوست. پس بشر بسیار به نادانی و نابینایی راه طی نمود و گاه به دره ها و لجن زار ها و گاه به انجیل نیکی ها که آن هم در میان راه بود ره می پیمود. قاف ران قرآن در حکم کلام خود میگفت که راننده و یا هول دهنده به سوی قاف است و این یعنی که خود آن گمشده ی انسان و قاف و قله ی پایان نبود. بسی زمان ها پس از آن گذشت و آدم به اضداد و کم و بیش نور اندیشه ی خود بر آن نشست. گاه آدمیت آدم می گشت نابود و گاه آدم نور را میافت و در آن لحظات خود خدا بود و نور بر او پرتو افشانی مینمود. کتاب قرآن به زبان قصص بر کودک اندیشه ی آدم خوانده و پر از رمز و راز و نور و تاریکی به حکم اضداد عالم و قانون خداوند خدا بود ( درخت میان در میان بهشت خدا بود و اضداد واجب الوجود عالم ماده مینمود )، پس کسانی به تاریکی ها گرفتار و کسانی نور را یافتند و راه به سوی قله ی قاف وجود گشودند از این سبب یکی حافظ لسان الغیب و مولانا و دیگری دجال زمان به نام دین و هر دو هرچه داشتند همه از دولت قرآن می بود.... . ( این سخن از هر دو گروه آنان بود )!!!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;زمانها گذشت و انسان اینک به اندیشه ی بیشتر نشسته بود. هزار و چهارصد سال چه ظلم ها و جهل ها و چه اندیشه های نیک چون صدرا و فارابی و ابن سینا آمده بود و رفته بود اما انسان به درک بینایان هستی نرسیده بود و بر آنها هم ظلم مینمود و کتب آنان نیز که همه از همان شکاف بود و خود بر آدمیان نوعی بت شکستن بود محکوم زمان بود، آن کتب هر یک مقداری روشنگر راه بود اما هیچ یک کت اب یا قله ی قاف و راه سعادت انسان نبود چون هنوز به عالم اضداد و فلسفه ی انسان و نه نور مطلق دانایی بود بدین سبب هر اندیشه ای که خود قدرت را کسب مینمود بازهم نتیجه ی آن جنگ بود و جنایت و ظلم به نام دین و فلسفه و ایدئولوژی و نسبیت بر اندیشه ی آدم حکم فرما بود. همچنان که گفتیم قرآن خود راه بود و راه نما ولی پایان حق نبود بلکه آن پایان رسالت در عالم اضداد بود. حجت این کلام را رمز نام قرآن که قاف ران بود بیان داشتیم، اما سوال اینجاست که گر قرآن را ق ران بیابیم ختم کلام قرآن یا رانش دهنده به سوی قاف و سرانجام و فاتح آن چه و که خواهد بود ؟ و چگونه میتوان فهمید که چه کسی به حکم رانش آن قاف ران و نور درون به انتهای راه آن یا قاف وجود رسیده و ناجی گشته بر آدمیان و در کمال میتواند فرمانی نماید به فتح قله ی قاف و توان بخشد بر آدمیان ؟ پاسخ این نکته زین پیش در سرزمین خدا و ادبیات کهن آن پارسی رفته است. آن پاسخ چنین است : به عشق و رانش سیمرغ، سی مرغ به قله ی قاف ره پیمودند و سیمرغ شه پر گشوده بر قله را دیدند آنگاه سیمرغ پر گشود پس آنان بر خود نگریستند و به خود آمدند و دیدند که در وحدت وجود خود سیمرغند !!! آری اتحاد و یگانگی مخلوق با خالق و نگاشتن الکتاب توحید و خواندن آدمیان به یگانگی و توحید و بیان راز و رمز آن و خواستن اتحاد انسانها و ره یابیشان به قله ی قاف و آواز گر به خود آئی به خدایی رسی به خود آ خواندن بر آدمیان محصول و نشان انتهای راه رسیده ی قرآن، و نشان فتح قله ی قاف و آواز الکتاب توحید آواز خوش سیمرغ قله ی قاف وجود است. و همین حجت کافی بر بنده ی بینا و توانای اندیشیدن است. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;در همه ی ادیان طلب منجی و پایان بود، هر انسان بنا بر نیاز خویش این منجی را طلب مینمود و هیچیک پذیرای منجی دیگری نبود. اما پایان آن بود که بر دو پای خود ایستاده بر قله ی قاف عالم اکبر و رها گشته از اضداد نیک و بد و راهنما و دستگیر آدمیان و در یافته ی درون و وارد بر ملکوت خدا بود. چراکه او هفت مایگاه و یا همه ی راه ها را رفته بود او در بی زمان و در هفت روز خلقت جاری گشته بود، پس او همراه و راهدان و راهبان و جهان بان و در نهایت راهبر آدمیان بود، پس از دل تاریکی ها قیام به حق و احقاق حق آدمیان نمود و خود سیمرغ وار پر گشود و هر چه از او هدیه بر آدم بود نور و روشنایی بود، کلام او دیگر کلام بی جان نبود بلکه او نور کلام و غیب آن را نشان مینمود و غیب کلام دیگر به عالم اضداد نبود غیب کلام، خدا و خداوند کلام و کلام مالک هستی و اندیشه ی آدم بود، پس این معنا بر اندیشه ی آدم فرمان و نمایان کننده ی نور و معجزات کلام به ره جویان طریقت دانایی و بازگو کننده ی تجربه ی خلقت در زمان و نور راه قله ی قاف و گمشده ی آدم، و نور حق بر اندیشه ی آدم و دست خدا به دست گیری آدم و توان بخشی به عالم جسم و جان بود، کلام او همه نیکی بود  پس به سه راه گفتار نیک پندار نیک کردار نیک، کت اب کتاب توحید را در هفت صفحه نگاشته و دست خدا را در دستان آدم نهاده بود و حکم سیمرغ را به اجرا نهاده بود و ناتوان را به توانایی جسم و جان رسانیده و دست در دست خالق راهی قاف عالم اکبر نموده بود. او معنای هستی و کتب پیشین را هم بر آدمیان آشکار و اضداد آنان را جدا و تطهیر کلام به ادراک زمان حال و آیندگان کرده بود، آری او امام زمان و دوران ها گشته بود و نام خود را بر خود میکشید. او سیمرغ قله ی قاف عالم اکبر بود. او غیب کلام امام را بر آدم آشکار نموده بود از این جهت نام بر بی نامی خود نهاده و امام را الف بر م الله میم نموده بود و او به خود آمده بود پس الله بر او وارد بود و آن آشکارا از اسفار سخن به عالم سخن آمده بود از این رو آدم امثله ی خداوند بود و خدا در وجود آدم خدا آدم بود و خادم به طریقی دیگر در جهان خلقت خود گشته بود، طریقت او دیگر تحمیل اندیشه ی ناتمام نبود بلکه راه دانایی را مینمود از این رو امام جعفر صادق فرمود : (( مهدی را از آن جهت مهدی میخوانند که هدایت میکند آدمیان را به راهی که مردم از آن گم شده اند و از آن رو قائم می خوانند که به حق قیام میکند ... )) راه آدم راه کمال و کمال در رسیدن به قله ی قاف بود پس قاف ران قرآن و تورات الانجیل راه رسیدن به الکتاب توحید و هدف در وحدت و یگانگی آدمیان و رساندن کلام خدا به برابری و عدالت و یکسانی بر همگان و انشاء تن و روان شرط درک آن بود. آری آن سیمرغ قله ی قاف یارومه ابراهیم میرزائی یم می م الله میم بود .... . &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;حال زمان به پایان و پایان به آغاز و بلوغ کودک اندیشه ی انسان و رویت نور و معنا و گذشتن از صورت ها و رسیدن به نهان دانای جهان در طریقت دانایان در مایگاه روح و روان بر آدمیان از آدم بشر به انسان، و کشف جان و روح روان یگانه فرجام نیک انسان در زمان و پیوستن به بی زمان و جاودانگی در بی زمان و حرکت بی پایان در زمان با ایمان به جاودانگی انرژی انسان مبارک باد بر ره یافتگان. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;پس خداوند به تجلی دانایی در میم یا هستی مادی و بیان کلام بر انسان از بانی آن زبان به فتح کلمه ی ابراهیم و میرزا یا بزرگ بزرگ آفرین توان حرکت به سوی قله ی قاف را در تن و روان آدم بنابر صفت پروردگاریش به نام کان کفو توان یا توان دست یابی به گنج پنهان ایجاد نمود تا که آدم بیدار و بینا بر آ ره به قله ی قاف گشاید و دانایی را که یگانه توانایی انسانی است کامروا گردد. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;حکم به برپایی رستاخیز تن و روان گشت تا که آدم ره گم کرده و سرگردان ز قبر وجود خویشتن بیدار گردد و به نیت رساندن میوه ی وجود آدم و تا خیزش او حرکت آغازیدن گرفت. آغاری بی پایان از پایانی بی آغاز ... .  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;سیمرغ جان به اکمال جهان تن و روان گامی به ورای عالم تن و روان و رو به روح روان نهاد و با فرا رفتن از اضداد و اتحاد با آن و دیدن گذشته ی سرد و تاریک انسان و سرگشتگی آدمیان اضداد بیان را ز یکدیگر جدا و در موزه ی امانات خلقت نشان و با بیان حق باطل را بطلان و به گذشته ها ی تار و یخ انسان سپرد و راه آیندگان را روشن نمود.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;درود بر سیمرغ جان ابراهیم زمان یگانه یار آدمیان و امام زمان آن اندیشه ی بی پایان و یگانه خواه انسان و ره نما به برون رفت از جهل جاهلان دوران، خاموش ولی پر بیان و دور و نزدیک به همگان و در اندرون عالم کیان پاسبان انسان.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الراهبر &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الهادی &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الحفیظ  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;م &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الله &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;میم &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;م &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;الله &lt;BR&gt; &lt;BR&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;
&lt;P align=left&gt;شهاب ابراهیمی&lt;BR&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;
&lt;HR&gt;

&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt; &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;پاسخ بر سوال برخی از هم میهنان : &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;کلام الله مجید نشان در عظمت کلام و کلام مالک اندیشه ی انسان است. کلام محدود نیست بلکه آن اندیشه ای است بی پایان و بلکه محدود خود کلام است کلامی محدود به نای آدمیان. غیب کلام وسعت دو عالم است. رموزات هستی در کلام و کلام کل و کلا ً م، م الله است.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;تفکر بر انسان جایز است و یک ساعت تفکر به هفتاد سال عبادت ترجیح داده شده است پس رموزاتی است که انسان را دعوت به تفکر مینماید و تفکر را لازم و ملزوم شناخت خود میبیند. در آیات ادیان اندیشه کنید که اسرار آنها به هفت پرده از آدم نهان گشته است یا آدم به هفت روز خلقت که مبنای بیان ادیان است نابینا بوده است. ادیان در اندیشه ی انسان نمود بودن یافت و به رمز الکتاب توحید ادیان واژه ای باطل است و تنها دین است و آنچنان که در ادیان و قرآن هم آمده است همه ی ادیان از آن خداوند خداست و همه تایید یکدیگر است و نه ابطال یکدیگر. اگر ما از بیان ادیان استفاده مینماییم برای بیان فاصله ی زمانی میان آنهاست و نه تفرقه و تفاوت قائل بودن میان کلام آنها. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;حال پاسخ گویید ؟ اگر به نا اندیشی و سطحی نگری بسنده شود و رموزات و تمثیلها به دریافت درک آدم نرود چگونه ادیان میتوانند تایید یکدیگر باشند و از آن یک خدا باشند ولی منجیان متفاوتی بر انسان فراخوانند ؟ بالاخره انسان باید به انتظار کدامیک از این منجیان بنشیند ؟ زمان ظهور آنها چیست و معنای ظهور چیست ؟ آنان غیبند و یا انسان نابینا است ؟ آیا باید در نام و اسم منجیان و پدرانشان ماند و یا منجی رسمی است بر عالم آدم ؟؟؟ آنها باید ظاهر شوند یا ما باید بینا شویم ؟ همانا خداوند هرگز زمین را بی حجت نگذارده است. در زمان ظهور منجی اسلام تکلیف یهودیان و مسیحیان و بوداییان و زرتشتیان و .... چیست ؟ آیا آنها منجی شما را قبول خواهند نمود یا او را شیطانی با کرامات و معجزات خواهند پنداشت ؟ آیا منجی شما ( منظور باور خرافی جوامع فعلی ما است ) برای صلح و دوستی خواهد آمد و یا خود خون ریز و جنگ پیشه خواهد بود ؟ اگر خون ریزی در میان باشد شما او و خالقش را به دانایی خواهید پذیرفت ؟ آیا تنها راه دانا نمودن و اصلاح جهان برای خالق توانای شما این است ؟ آیا در اندیشه ی شما گر زمین اینگونه اصلاح شود دانایی برای خداوند قائل گشتن جایز خواهد بود ؟ به قدرت جسمانیه و معجزات بر دیگران پیروز گشتن قدرت آفریدگار ماست ؟ یا کردار ظالمان زمان ؟ روشن بینی چیست و تاریک بینی و خرافه بافی حاصل چه دورانی است ؟ معنای امام زمان چیست ؟ آیا خداوندی که قوانین طبیعت را وضع نموده است، همچون انسانهای قانون گذار خود بر قانونش مهر باطل میزند و از آن سرپیچی میکند و یا خود اول مجری آن میشود ؟ اگر قانون طبیعت خواست خداست پس چگونه انسانها در 100 سال میزیند ولی ممکن است شخصی 1500 سال بزید و حتی غیب شود و آشکار ؟ آیا این زیر پا نهادن قانون خلقت آدم نیست ؟ گمان نمیکنید ترویج چنین عقاید خرافی کار همان هایی است که با نام دین و با نقاب دین بر انسانها حکومت میکنند و میخواهند با چنین عقایدی راه را به نام دین بر منجی حقیقی انسان ببندند ؟ آیا یهودیانی که میپنداشتند عیسی باید از ورای ابرها و به عالم معجزات نمایان شود و انسانی خارق العاده باشد درست می اندیشیدند و مصلوب نمودن مسیح خدا جایز بود ؟ چون او انسانی معمولی بود و در درک آنها نبود که رسول یعنی چه !!! آیا آنانی که بر محمد خدا خشم نمودند چون او ادعای پیامبری نموده بود درست میگفتند و او پیامبر نبود ؟ آخر او معجزاتی هرچند اندک هم نداشت و تنها نشان رسالتش کلامش بود. آیا توان دید خداوند بر نادانان و دانایان برابر است و یک نادان و دانا در مقابل منجی آخرین یک راه را در پیش میگیرند چراکه او را به عالم معجزات دیده اند ؟ آیا اگر کسی قرآن را در دست گیرد و نمایش قرآن دهد برای شما مسلمان شناخته میشود یا آنکس که اعمالش نمود حقیقت قرآن است ؟ فکر نمیکنید که در زمان ما باز هم گروهی قرآنها را بر سر نیزه ها زده اند و پرچم الله برافراشته اند اما در اعمال باطل و ظلم و ستم به انسانها پا نهاده اند ؟ آیا آنکس که آگاه بر کلام خدا خود را قرآن ناطق بخواند و در مقابل این مشرکان بایستد کفر گفته است و ما باید چون اعراب زمان جاهلیت بر او پشت کنیم ؟ شما گمان نمیکنید که در صفوف ایستاده بر نماز ابن ملجم ها فراوانند باز ؟  ؟؟؟!!!!!!! &lt;BR&gt; &lt;BR&gt; درود بر پاسداران انسانیت &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;به اندیشه ایم.........&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;شکر خدا که هرچه طلب کردم از خدا           بر منتهای همت خویش کامران شدم&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/DIV&gt;
&lt;DIV style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;arial, helvetica, sans-serif&quot; color=#cc3333 size=4&gt;شهاب ابراهیمی&lt;BR&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/FONT&gt;</description>
<pubDate>Thu, 07 Aug 2008 18:01:07 GMT</pubDate>
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<title>پیام سازمان یگانگی</title>
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<description>&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;پیام سازمان یگانگی به ملت ایران &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;بر شما ای زنان و مردان و ای خلق های مبارز درود ..... &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399 size=2&gt;بیا تا گل بر افشانیم و می در ساغر اندازیم      فلک را سقف بشکافیم و طرحی نو در اندازیم &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;هم آشیان لحظه ای بر کلامم بیاندیش من با تو سخن میگویم که انسان را در معنای انسانیتش می خواهی :  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;اگر ما امروز برای آزادی میهنمان از چنگال ستم کاران زمان نتوانیم اختلافات را کناری نهیم و اعتقاداتمان را بر سر میز مذاکرات اندیشمندانمان بریم، چگونه میتوانیم برای مردم و توده ها تضمین نماییم که در صورت پیروزی ملتمان در انقلاب پر شکوه پیش رویمان، احزاب و گروه هایی (( همچون انقلاب 57 ایران )) گروه ها و سازمانهای دیگر را محکوم به نابودی و سکوت نمینمایند ؟ &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;یا به عبارتی فرهنگ دمکراسی را چگونه میتوان در نهاد انسانها بیدار و وجود و برخورداری از آن را در اندیشه هایمان به اثبات انسانهای ناباور زمانمان رساند تا انسانها با اعتقاد و ایمان به راه پیش رویشان و در وحدتی بی مانند برای آرمان فرداهایشان گرد هم آیند و در هم بکوبند حکومت جور و استبداد زمان را ؟ &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;آری انسان امروز سرشکسته از گذشته های مورد بهره برداری شده اش نیازمند یک تضمین جدی برای اتکا و اطمینان به هر حرکت دوران ساز زمان است. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;ما باید یک صدا و با آهنگ وحدت یکایک مقتدر باشیم و در کنار هم در راه آزادی ایران و ایرانی لحظه ای را بیهوده نگذاریم ... . &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;آیا تنها پیوستن احزاب و سازمانها به سازمان یگانگی انسان نمیتواند نشان دهنده ی مردمی بودن و میل آنها به رهائی و آزادی ایران و ایرانیان باشد ؟  و آیا این حرکت از سوی گروه ها چیزی جز تضمین قدرت طلب نبودن انحصاری آنها و اثبات صداقتشان در رابطه با مردم و گروه های دیگر است ؟  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;آیا احزاب امروز ما با محکوم نمودن و توطئه بر ضد یکدیگر میتوانند مدعی ساختن ایرانی آزاد و آباد و انسانی سعادت مند در جامعه ی آینده ی ما باشند ؟  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3399 size=3&gt;انسان از دیدگاه سازمان یگانگی مختار است و میتواند خود را در قالب های محدود فکری و نام ها همچون احزاب و برخی گروه ها معرف بر جهان خارج از خویش شود اما تحمیل این محدودیت ها و ایدئولوژیهای فکری بر سایر انسانها را محکوم در هرگونه اندیشه ی آزادی خواهانه ی انسان امروز میدانیم و در این رابطه نظر شما را نیز میخواهیم ؟؟؟ &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;پس راه حل جلوگیری از برخورد تضادها و در نتیجه ی آن تحمیل و ابراز قدرت نظامی در میان انسانها، استفاده و برخورداری از تمامی اندیشه ها در فضایی دمکرات و ایجاد سیستمهای ارزشی و سنجشی در بررسی تزها و ایده های اجتماعی و افکار انسانی مورد بحث و اختلاف میان اندیشمندان درون سازمانها و احزاب، الزامی و پیشنهاد امروز و ایجاد آنها راه آینده ی سازمان یگانگی انسان است ... . &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;دوست من مگر نه اینکه امروز ما همه یک نیت اصلی و مشترک در مبارزی مان داریم ؟ و آن آزادی و برابری  همه ی انسانها است ؟ پس چرا من و تو ما نشویم ؟ بر این دو پایه ی اندیشه ی انسانی از کل کلمات این مقوله و با شرط قبول این آرمان انسانی میگوییم که فریاد برحق انسانها را شنیده ایم و به ادراک مشکلات زمان به تمرکز نشسته ایم، پس میخوانیمتان اینک به وحدت در راه رهایی و با پذیرش این دو اصل انسانی از سوی هر گروه و سازمان و حزب و تشکل مردمی خود را آماده به حمایت و به این وسیله اعلام میکنیم دعوت از آنان را در راه پیوستن به یکدیگر برای ساختن فرداهایی بهتر... . پیروز خواهیم شد و پیروزی از آن ما است، چون قانون قانون انسانهاست ... . &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;بی شک پذیرش این دعوت از سوی احزاب و گروه ها و سازمان ها نشان دهنده و اثبات کننده ی مردمی بودن و ازاد اندیشی و دور اندیشی آنان است و این نوید پیروزی همگان است چرا که یگانگی در معنای خود برابری همه ی انسانها را در برخورداری از حقوق انسانی دارا میباشد. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;اینک ای برادر و خواهرم شما را میخوانیم به درک آرمان یگانگی و میگوییم که قصد به ثمر رساندن صبر پربارتان را در مبارزات آزادی خواهانه ی تان داریم و بر تمام اندیشه های والای انسانی ارج و احترام میگذاریم. ما صدای زنان و مردان و جوانان ستم دیده ی میهنمان را در زیر فشارها و تحدیدات جانی و هر لحظه ای که اعمال شده از سوی حکام باطل و شیطانی سرزمینمان است شنیده ایم، ما در کنار مردم ایران هر روز و هر لحظه قدم نهاده ایم و برایشان به اندیشه نشسته ایم و حتی از جان خویش هم گذشته ایم، ما صدای انسانهایی را که در زیر فشارهای اقتصادی و نابهنجاری های اجتماعی و روانی رو به فروپاشی و شکستگی ابعاد وجود نهاده اند شنیده ایم و به یاری آنها شتافته ایم و با تمام توانمان در این راه برخاسته ایم، آیا شما هم صدای ما را میشنوید ؟؟؟؟؟؟؟؟؟؟ &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3399 size=4&gt;من ار چه حافظ شهرم، جویی نمی ارزم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;&lt;FONT size=4&gt;مگر تو از کرم خویش یار من باشی &lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#ff3399 size=4&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3399&gt;نوسنده : همراه کامرون&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;&lt;FONT size=4&gt;
&lt;P align=center&gt;
&lt;HR&gt;

&lt;P&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#ff33cc size=4&gt;وخون بر سنگ فشاند قابيل&lt;BR&gt;آنگاه كه حسد بر انسان حكم است&lt;BR&gt;يگانگى بر انسان حكم زمان است&lt;BR&gt;و قابيليان در آتش خود سوخته&lt;BR&gt;به بيان انسانيت امر رواست&lt;BR&gt;و انسان در درون بايد سوختن&lt;/FONT&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=3&gt;&lt;FONT color=#ff3399&gt;&lt;FONT size=2&gt;درود بر پاسداران انسانیت&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;</description>
<pubDate>Sat, 12 Jul 2008 16:40:18 GMT</pubDate>
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<title>زندگی امروز ما تحقق داستان ارباب حلقه ها است پس به پا خیزید ای یاران حق و حلقه ها بر پاسازید</title>
<link>http://yeganehagh.blogfa.com/post-12.aspx</link>
<description>&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;ارباب حلقه ها &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;بشنوید اینک صدای اوسیمای شهر توآ را که سیمای اوست ( هو الحق )، پس از خود آیی در مایگاه خدایی و اندر صورت او راز دانایی را بر شما می خواند و دانائی انسان را می خواهد .... &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;ای جوانان با ایمان و ای سربازان دلیر شهر توآ بشنوید این سروده ی انشاء تن و روان را که شما را روان در دو عالم میکند. پس در این آهنگ الهی به رقص آیید که آهنگ هم آهنگی جسم و جان آدمیان و ندای کمال هستی هستا است. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;زمان زمان اتحاد و هم آهنگی دانایان در راه زدودن زنگارهای باقی جهل از پیکره ی اندیشه ی آدمیان است.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;اتحاد انسانها فرمان است ... &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;فرمان اتحاد و وحدت آدمیان یگانه فرمان است و یگانگی فرجام حق و عدالت و معنای انسانیت انسان است ... پس بخوانید اینک آهنگ یگانگی آدمیان را در گوش ها و گره کنید در هم دست ها و برپا سازید اندیشه های خروش خلق ها را ... &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;همانا آیندگانمان افسانه های شیرین خواهند خواند از حرکت انسان ساز حالمان چرا که میدانند افسانه ها بهترین شیوه ی بیان و انتقال حقایق تلخ و شیرین و جاوید دوران ها است... &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;فرمان یگانگی زمان مرگ من برای تولد ما است ... اینک داستان ما داستان ارباب حلقه ها است و حلقه نشان اتحاد است و حلقه ی انسان ها راز پیروزی ما است.  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;پس حلقه ها بسازید از دست هایتان و ندای یگانگی انسان برآورید از حلق هایتان و ندای حق را از حلق فریاد کنید و با حلقه ی پرمعنایتان در هم بپاشید کاخ های این ویرانگران ستمگر و اهریمنان دوران را ... بجوشید و خروشید و در هم بپاشید بنیان ظلم این کهنه بیدادگران جهان را ... &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;انشاء کنید اینک رسم منشاء انواع را در نشئه ی اشیاء و بجوئید اسرار جان را در جام جهان سوزان ...  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;نگین دانائی زیور وجود دانایان و جویندگان اسرار انسان در معبد اندیشه ی کیهان یهنی انسان و کت اب کتاب توحید حلقه ی آن نگین اینک بر دست هایمان ... پس چه باک از اهریمنان دوران ؟؟؟؟  &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;به رسم شجاعت بی مانند پیر دانایان خواهیم تاخت تا فتح فرازهای قله ی انسان و خواهیم شکست بنیان قدرت شیاطین به زدودن جهل آدمیان و این معنای امام زمان یا نوید فرجام شبهای قابیلیان و احقاق حق وجود هابیلیان و ثمر مشت های گره کرده ی دانایان و متو نشان آن ز جان بر دو جهان .... !!! &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;اینک زمان برپا سازی قیام انسانهاست زمان یکی شدن فریاد خلق ها در حلقه ها است و این یگانه در وحدت همیشگی انسانها است. &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=justify&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333 size=4&gt;حق همراهمان و سیمرغ جان نشان آن در سرودن وحدت و یگانگی بی مرز انسان ... پس درود بر اندیشه ی بی پایان سیمرغ جان ابراهیم زمان و میر زای اندیشه ی انسان در زمان و یگانه امام زمانمان و حی الحضور آدمیان ... پس قیام وحدت نشان دانایی و خود آیی انسان و چه شکوهی است آن زمان که فریاد برآوریم بی زمان .... . &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff3333&gt;سلسله ی موی دوست حلقه ی دام بلاست       هرکه در این حلقه نیست فارغ از این ماجراست&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;FONT color=#ff3333&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P align=left&gt;&lt;FONT color=#ff3333&gt;نوشته ی : کامرون&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P align=center&gt;
&lt;HR&gt;

&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;DIV class=hide style=&quot;PADDING-RIGHT: 8px; PADDING-LEFT: 8px; BACKGROUND: #ffffcc; PADDING-BOTTOM: 4px; PADDING-TOP: 4px; BORDER-BOTTOM: #eeeeee thin solid; FONT-FAMILY: Arial,sans-serif&quot; align=justify&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;انسان این زمان برای دست یابی به اطمینانی از آینده ی حرکتش در راه قیام وحدت نیازمند خود یابی است، سموم تلخ و شیرین دوران و نارسایی اندیشه های گذشتگان و فریب خوردن های پی در پی انسان و تاثیرات حکومت جاهلان بر اجتماعات انسان موجب به بروز مسمومیت اندیشه ها و نوعی بی دفاعی روانی در مقابل فشارها و پذیرش محکومیت ها گشته است و این امر دلیلی به ایجاد فضای فکری پوچ گرایی و عدم اطمینان به بزرگ مردان دوران و انجماد و سردی اندیشه ی انسانها فراهم نموده است ...  &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=justify&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;اما شناخت بیماری اولین گام درمان و درمان این بیماری مساوی است با به جوش آمدن تن و اندیشه ی انسان و ظهور وی در فرهنگ انقلابی، که یگانه تحت چنین شرایطی میتوان سعادت بشر و آینده ی هر حرکت انقلابی را تضمین نمود، چراکه به تجربه دیده ایم چه بسیارند دیکتاتورهایی که در هر زمان با تکیه بر جهل همنوعان قصد حاکمیت و چپاول آدمیان را می نمایند !!! اما میدانند ملتی که در آن فرهنگ انقلاب باشد و انقلاب یک فرهنگ جاویدان گردد هرگز قابل استعمار و استثمار نخواهد بود، به نسل ها باید آموخت که انقلاب و تحول دائم شرط یک جامعه ی سالم و پویا در هر زمان است و فرهنگ انقلابی و انقلاب فرهنگی یگانه شرط پیروزی و تضمین تحولهای عظیم مثبت در جامعه خواهد بود ... و این یعنی حتی اگر انقلابات مکرر هم لازم بر اجتماعمان شود آن انقلابات نیاز برون رفت از شرایط انجماد است و نباید خسته کننده و محکوم و بی میل به آن خود را بدانیم. ما همیشه ایستاده ایم به راه هر تغییر مثبت و انسان ساز و فرهنگ انقلابی است درس این زمانمان بر انسان.&lt;BR&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=center&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;تحت چنین ایمانی است که میگوییم : &lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=center&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;انقلاب واقعی بشریت انقلاب اندیشه ها است &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=justify&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;آری شناخت بیماری یعنی گامی به سوی درمان آن و درمان چنین بیماریی یعنی خروج انسان از دایره ی جهل حاکمان دوران و درهم شکستن حکومت تحمیل گران بر اجتماعات انسان و این یگانه با انقلاب زنان و ایجاد صفوفی متحد در راه احقاق حقوقشان امکان پذیر است ... &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=justify&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;در راه طریقت دانایان سخن از فرد یا افرادی معین نیست، سخن از من و ما نیست، سخن از بررسی راه رهایی انسان و توانایی رهبری در راه ایجاد اتحادی انقلابی و توان بخشی آدمیان و ایجاد دانایی و بیداری در اندیشه ی انسانهاست و باطل حکومتی، در پس حکومتی باطل گشته مورد پذیرش ما نیست ... واژه ی حکومت خود اولین محکوم به نابودی اندیشه ی دانایان و بطلان این واژه یعنی یگانه آزادی انسان از بردگی و محکومیت در زمان ...  &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=justify&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;کلاممان ساختن اندیشه های نوین است در راه دست یابی به جهان شایسته ی انسان و در این راه روشنفکران و بینش مندان و دانش مندان زمان پشتوانه و یارمان و ما در پایگاه اندیشه ی علمی گوش به کلام همگان حال با هر نام و مکتب فکری که بر خود گزیده اند میباشیم و تصور مخالفت و یا تضاد ترقی خواهانه ی انسانها با راه دانایان اندیشه ای است بی بنیان و آزادی و یگانگی انسانها آرمان این زمانمان و وجود حکومت انسان بر انسان اولین محکوم اين دوران و ظلم ایجاد شده بر پایه ی آن دلیل و برهانی قاطع بر نا آرامی و مبارزه ی مان در هر زمان است ... &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=justify&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;پس میخوانیم اندیشه های راستین آدمیان را به برادری و اتحاد و این است نور حرکت جاوید دانایان در اندیشه ی آدمیان محکوم در جهل جاهلان زمان. &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=justify&gt;&lt;FONT color=#ff6633&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; size=4&gt;برکندن بنیان های کهن ظلم نقطه ی آغاز تفاهم تمامی اندیشه های انسانی در راه ایجاد هماهنگی و اتحاد در حرکت دوران ساز و لحظات قیام وحدتمان است ....  &lt;BR&gt; &lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff6633 size=4&gt;م الله لحظه ی پیوند انسان با ماهیت وجود  &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff6633 size=4&gt;و &lt;/FONT&gt;&lt;FONT face=&quot;Tahoma, Arial, Helvetica, sans-serif&quot; color=#ff6633 size=4&gt;حفاظت از شان انسان است&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=center&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 1ex&quot; align=left&gt;&lt;FONT color=#ff3333&gt;نوشته ی : همراه کامرون&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 12 Jul 2008 08:19:18 GMT</pubDate>
<comments>http://commenting.blogfa.com/?blogid=yeganehagh&amp;postid=12</comments>
<dc:creator>yeganehagh</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>مهدی موعود</title>
<link>http://yeganehagh.blogfa.com/post-11.aspx</link>
<description>&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;به نام هستی بخش هستا&lt;?xml:namespace prefix = o ns = &quot;urn:schemas-microsoft-com:office:office&quot; /&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;مهدی کیست ؟!&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;می خواهم سخنی از اعماق دل با شما دوستان داشته باشم، طبیعتا ً این سخنان به مزاج آنان که بقای حاکمیت ننگینشان را در گرو خرافی و نا آگاه ماندن مردم میبینند و همچنین آنان که گرفتار رکود&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=ltr style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;&lt;/SPAN&gt; &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;و انجماد اندیشه می باشند خوش نخواهد آمد! مهم در این مقوله درج اندیشه و پاسخی است که شما میتوانید به آن دهید ! اما از شما میخواهم گر پاسخی منطقی به سوالهای من نداشتید تا حد امکان آنان را بیشتر درخور اندیشه و تفکر بیابید. سخن من در باب شناخت منجی آخرین است و یا به تعبیری امام زمان.&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;بسیاری شنیده ایم و دیده ایم که از نام امام زمان برای انسانها تصویری افسانه ای ساخته اند که آن تصویر و مقدمات ظهورش آنقدر معجزه آسا و غیر قابل تصور است که پذیرش بسیاری از آن مسائل بسیار سخت و گاها ً غیر قابل پذیرش است و همین امر موجب میشود که بسیاری از اندیشه های توانا ترجیح دهند کلا ً منکر وجود حقایقی در ادیان و الاهیات شوند و منکر حقانیت اعتقادات منجی مدارانه گردند و چشم بر حقیقت وجود و تاثیر مردان بزرگ و ناجی&lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt;  &lt;/SPAN&gt;تاریخ که همیشه با خون و اندیشه و بازوان خود عامل تحول تاریخ گردیده اند بربندند.&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;به قول مبارز راه آزادی خسرو گل سرخی : (( همیشه یک نفر باید که برخیزد، آری، تساوی اشتباهی فاحش و محض است، بچه ها در دفترهایتان بنویسید : یک با یک برابر نیست ! )) البته آنان حق &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;دارند، چرا که اعتقاد به وجود چنین منجی ای که قرار است به ناگهان از ورای ابرها و با معجزات و وقایع متحرالعقول بیاید و همه چیز را درست کند آنچنان که تجربه نشان داده حاصلی جز رخوت در تن و اندیشه ها و عدم مسئولیت پذیری آدمیان در جامعه برای اصلاح و مبارزات انسانی و ترویج خرافات و مجال سوء استفاده ی گروهی دیندار نما فراهم نکرده است. و همین اعتقادات متحجرانه و برداشتهای سطحی از عقاید دینی عمده دلیل عقب افتادگی فرهنگی در کشورهای سنتی و دین مدار است.... .&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;اما به راستی پایگاه درک و اندیشه ی آدمیان زمان ما در کجاست ؟ چطور و با استناد بر چه منطقی گروهی به خود اجازه میدهند چنین استنباطها و استنتاجهایی سطحی از مفاهیم عمیق ادیان داشته باشند ؟ مگر نه اینکه&lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt;  &lt;/SPAN&gt;به سادگی میتوان فهمید که این افکار خرافی هیچ پایگاه ایدئولوژیایی مذهبی و فکری و منطقی و ... ندارند ؟ آیا عدم آشنایی به زبان تمثیل در ادیان و اسرار و پیچیدگیهای آن موجب این سطحی نگری ها شده و یا در تاریخ عده ای به عمد کوشیده اند که اذهان توده ی مردم را در همین حدود نگاه دارند ؟ و در نتیجه هم از اعتقادات آنان سوء استفاده نمایند و هم راه را به تعبیر خودشان بر منجیان حقیقی و انسانهای والا و خود مدار و خداشناس به بهترین شکل ممکن بسته باشند ؟ مگر نه اینکه هر پیامبری در زمان خود برای اثبات رسالتش شدیدترین سختی ها را متحمل گشته است ؟ مگر نه اینکه حضرت عیسی (ع) را تنها به دلیل ادعای پیامبری به صلیب کشیده اند ؟ مگر نه اینکه خداوند به حضرت محمد (ص) فرمود : (( ای محمد به آنان بگو همانا ما هر آنکس را که بخواهیم به رسالت خود برمیگزینیم نه آنکس را که آنان انتظارش را داشته باشند ؟!! )) &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;آیا این جالب نیست که چرا سیاستمداران انتظار دارند منجی از فیلتر اعتقادات منجمد و متحجرانه ی شان گذر کند و بی شرمانه خود را در مقام رد و یا تعیید وی میبینند ؟!!!! چرا ما به این مطلب نمی اندیشیم که بارها به حضرت محمد در قرآن فرموده شد : (( ای محمد تنها معجزه ی تو قرآن کریم است و آن آخرین معجزه است )) مگر نه اینکه آن حضرت سه سال از خداوند ملتمسانه خواستند که به ایشان قدرت معجزاتی چون پیامبران پیشین را دهد ؟ و خداوند در جواب ایشان فرمود : (( ای محمد هدایت تنها در توان و مشیت خداست و وظیفه ی تو همانا دعوت است و اگر کفار به عالم معجرات هدایت شدنی بودند با همان معجزات پیامبران پیشین هدایت میشدند و ایمان می آوردند همانا بر آنان پیش از تو معجزات بسیار نمایان کردیم، همانا خداوند بر قلوب آنان که در کفرشان اصرار ورزند مهر میزند و آنان را راه نجاتی نیست !!! )) پس به سادگی در میابیم که ریشه ی اعتقادات خرافی پیرامون منجی آخرین حد اقل دین اسلام نیست، و حقیقتی که باید پذیرفت این است که این مسلمان نماها اصلا ً کتاب آسمانی خود را یک بار هم نخوانده اند و از آن هیچ نمیدانند و فقط کورکورانه خود را به زبان آخوندهای شیطان سپرده اند تا آنان بگویند دین چیست و چه کنید و چگونه بیندیشید و راه بروید و عبادت کنید !! و افکار عادتی هم که مجال ندیشیدن را از آنها گرفته است !!!. و حاصل، همین بدبختی ها و نارسایی هایی که در جوامع مسلمین میبینید !!! &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;آخر میگویند حتی کسی اجازه ی ترجمه ی روان قرآن را هم ندارد. چون میخواهند مردم در درک گفتار آن نادان بمانند و هرآنچه شیاطین میگویند را کورکورانه بپذیرند.!!! در اسلام بارها به صراحت پایان معجزات با نزول کلام الله مجید عنوان گشته است، در حالی که ظهور مهدی مسلمین امروز در نزد عوام &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;با چه معجزاتی که عجین و همراه نگشته است ؟!!!. در سویی دیگر آیا منطق به ما این اجازه را میدهد که به این موضوع نیندیشیم که چگونه خدای عادلی که 128 هزار پیامبر را خادم آدم نمود و آنها را به تحمل شدیدترین سختی ها &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;برای نجات آدم برد، حال برای اصلاح عالم از راه قبلی خود پشیمان گردیده و صبر و عدالت و رحمتش را که البته سه صفت اصلی خداوندگار است زیر پا گذارده و می خواهد شخصی را به عالم معجزات بر تمامی ستمگران پیروز گرداند و به درک اندیشه ی آدمیان بنشاند ؟!!! &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;مگر نه اینکه خداوند از ابتدا بر نتیجه ی کار پیامبرانش آگاه بود ؟ پس عدل این خدا در کجا خواهد بود که عیسی به دلیل ادعای پیامبری بر صلیب کشیده شود و با سنگ بر دهان محمد بکوبند اما منجی آخرینش به سادگی بر همگان پیروز شود ؟ و همگان به آسانی بر او ایمان آورند ؟ و همه چیز روبه راه گردد !! آیا خلقت انسان بی هدف بوده و یا خداوند تنها با هدف بازی و سرگرمی خلقت را به مرحله ی آدم رسانیده است ؟ آیا شان آفرینش انسان و درک انسان این زمان در این است که وی به عالم معجزات ایمان بیاورد ؟ و یا قدرت اندیشه و اختیار اوست که ایمانش را نگین آفرینش میکند ؟؟؟ &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;اصولا ً معنا و هدف مشاهده و کشف چیست ؟ مگر نه اینکه اگر ما با دیدی عمیق و روشن به هر زاویه ای از هستی بنگریم، از نظم و عظمت و پیچیدگی آن مبهوت میشویم ؟ به راستی که تمام خلقت و تولد و مرگ آدمی معجزه ای است شگرف و دانایان هرگز نیاز به حرکات محیرالعقول برای ایمان آوردن به آگاهی پنهان هستی یا خداوندگار قادر ندارند. البته من منکر کرامات و توان معجزات نمیشوم اما میگویم که در شان انسان اندیشمند نیست که اینچنین و بر این پایه ها ایمان بیاورد و گر چنین شود هم آن ایمان، ایمان با ارزشی نخواهد بود. آیا هدف و آرمان تکامل چیزی جز توانایی اندیشه ی آدم در دیدن سویه ی پنهان هستی و درک و خودآیی و خدایی است ؟&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;آن سوی کجاست و چگونه میتوان آن را دید ؟ معنای آزمونگاه آفرینش در چیست ؟ عبادت متوجه ی اندیشه است یعنی چه ؟ و چرا انسانهای این زمان هنوز در ظواهر و خرافه بافی ها وامانده اند ؟ این ضعف عمومی اندیشه ی بشر از کجاست ؟ و مسببان آن چه کسانی هستند ؟ آیا ساده تر است بپذیریم که خداوند در مقابل خلقت خود بی مسئولیت است و شاهد اینهمه جرم و جنایت ؟ یا میتوان همچون مولانا فهمید که (( هر لحظه به شکلی بت عیار عیان شد ! دل برد و نهان شد ! منصور نبود آنکه بر آن دار برآمد، نادان به گمان شد !!! )) &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;پذیرش خدایی بی صدا برای انسان امروز راحت تر است یا پذیرش خدایی که هرگاه به شکلی در میان خلقتش هی حی الحظور میشود و با به سختی بردن خود سعی در هدایت آنها میکند چون صابر است و رحمان و میخواهد که به خود همچون گذشته از آفرینش آدم احسند گویند ؟ مگر نه اینکه شیطان به انسان سجده نکرد چون خود را بالاتر از او میدانست ؟ و مگر نه اینکه خداوند او را به همین دلیل از درگاه خود راند ؟ پس پذیرش منجی ای به صورتی که در یک شب به عالم معجزات ستمگران را مغلوب و انسان را سعادتمند کند به معنای پذیرش شکست خدا در مقابل شیطان و اثبات نادانی و کم ارزشی آدمیان توسط شیطان به خداوند و بی اعتباری خلقت است.!! &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;اما اینچنین نیست و خداوند میخواهد که انسان به صبرش ثمر بار آورد و دانا شود و از این رو طریقت دانایی بر انشاء تن و روان را حکم خلقت میکند. مگر نه اینکه خدا داناست و حکیم ؟ پس به عالم دانایی معلم انسان میشود تا دانه ی آدم رویش دهد نه اینکه به نمایش قدرت خود در مقابل انسانهای کوری که تا آن زمان این قدرت را در آیات هستی ندیدند رود، همانا این افکار زاده ی ذهن کم اندیشانی است که خداوند رحمان را چون خود زورمدار و ستمگر میپندارند. به قول شاعر روشن اندیش میهنمان احمد شاملو : (( من بینوا بندگکی سر به راه نبودم و راه بهشت مینوی من بزرع توع و خاکساری نبود - مرا دیگر گونه خدایی باید، شایسته ی آفرینه ای که نواله ی ناگزیر را گردن کج نمیکند! پس دیگر گونه خدایی آفریدم! ... اما سرنوشت تو را نه خدا و نه شیطان، سرنوشت تو را بتی رقم زد، بتی که دیگرانش میپرستیدند.!!! بتی که دیگرانش میپرستیدند !!! )).&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;مدتها است که سوالی برای من مطرح است ؟ ما میگوییم که آدم نمیتواند خدا شود! اما آیا به نظر شما خدا هم نمیتواند آدم شود ؟!! مگر نه اینکه او را توانا به همه ی امور میدانیم ؟ مگر نه اینکه چون آدم امثله ی خداوند بود &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;بر فرشتگان فرموده شد که آدم را سجده کنند ؟ مگر نه اینکه او مبداء بود و آدم معاد ؟ مگر نه اینکه او از روح خود در ما دمید ؟ پس پاسخ گویید که اینک خدا آدم شده است یا آدم خدا ؟ اول کدام بود که بشود و آخر که بود و چه بود و از که بود و بود یعنی چه و همانا نابودی من بود اوست ... دلیل شک بر این حضور بی واسطه چیست ؟! آیا آنهایی که بین خدا و آدم فاصله دیدند و سجده بر حق آدم نکردند در آن روز از درگاه خدا رانده شدند و یا آنان که سجده کردند و چون خدا حجابی بین او و آدم ندیدند ؟ سجده ی آنان به راستی سجده به آدم بود و یا خداوندگار هستی بخش ؟ &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;مگر خدا کارگر و بنای اول خلقت نیست ؟ مگر خدا نامحدود نیست ؟ مگر نمیگوییم خداوند همه جا هست ؟ پس آدمی که کارگر و خادم و خدمت گذار خلقت است در حقیقت خداآدم و دست خدا بر روی زمین است و ید الله فوق ایدیهم است. &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;حال شما بگویید که کجای این سخن کفر است ؟. (( رومی سخن کفر نگفتست و نگوید، منکر مشویدش، کافر شده آن کس که به انکار برآمد، از دوزخیان شد )). مگر نه این بود که بنای هستی به نای آدم رسید و از آنجا دوباره در عالم غیب کلام رخ نمود ؟ مگر آخرین معجزه کلام نبود ؟ هرچند که در دید یک انسان آگاه کل نظام هستی معجزه است و شکوه بی پایان آن جای سوالی برای درک دانایی جاری در آن باقی نمی گذارد!!! &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;از شما سوال دارم که خدایتان چیست ؟ آری این خداست که آدم میشود و آدم در روی زمین دست خدا و خلیفه ی الله و یا بقیت الله میشود و آنکس که به آگاهی بر دانایی هستی رسد با درک احوالات و معجزات کلام الله با آن شعور بی پایان مرتبط و منجی و امام زمان خواهد بود و همانا اوست که ندای آخرالزمان را سرود. پس به قول م الله (( خداآدم بار خلقت را بر دوش میکشد نه اینکه خود باری بر خلقت شود ... )).&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 14pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt; گر به خود آیی به خدایی رسی به خودآ .... &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 14pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;خدا از ما جدا نیست ، خدا بر اندیشه ی انسان آماج برتری است. &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;از شما سوال دارم که چرا میگویند ید الله ؟ و ید الله را بالاترین دستها میدانند ؟ مگر نه اینکه دست ابزاری مادی است ؟ اگر میگویید که این مطلب تمثیل است و مثال، پس چرا به مفاهیم دیگر دینی به چشم تمثیل نمینگرید و آنان را در ساده ترین شکل ممکن میخواهید قبول و بی اندیشه بر دیگران نیز تحمیل نمایید ؟؟! &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;آری معاد خدا ماده میشود و عقل اول در خلق به حلق و از آنجا بار دیگر به خود یا به نقل که صورت عقل است میرسد و این معنای انا للاه و انا الیه راجعون است. حال آدمیان در صورت خدا و یا نقل مانده اند و از معنای آن نقل یا عقل درون آن ناآگاهند!!! به این سبب پی به حق سخن و معجزات و دانایی آن نمیبرند!!! و تنها با آگاهی بر آن است که دانا خواهند شد. پس آنکس که به خود آمد و تن و روان کمال کرد و پرده از اسرار این نقل برداشت و به ادراک آن رسید همانا منجی آخرین و صاحب حکم کلام و حضوری در عالم معنا و خود معنا است. &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;همانا اوست که معنای ناب دانایی نهفته در کتب آسمانی را به بشر نمایان و پرده از اسرار آنان برداشت و چرایی معجزه نام نهادن قرآن را به درک سره فارسی به ما فهماند. خداوند در وجود آدم به قوه ی خود به خود میرسد و چون به خود رسد همانا دوباره خداست و حکم میکند خودآ و همانا خدا آگاهی ناب است و خود آگاهی بالاترین آگاهی است. مگر نه اینکه نقل زاییده ی عقل است و عقل اول اوست و همان نقل است که عقل آدم میشود ؟ مگر نه اینکه آدم آدم میزاید ؟ پس خدا یا عقل اول هم عقل و اندیشه میزاید و نقل که صورت اوست و از آن اوست و همان است که آفرنده ی عقل و خود آگاهی آدم و هیچ چیز از خدا جدا نیست و کلام، کلام الله مجید است و حکم آن کلا ً م الله میشود و میگوید که کل یا همگان باید به درک کلام روند جان کمال کنند تا م الله شوند و وارد بر عالم غیب کلام باشند و وجود خود مطهر دارند، آنگاه انسان به بازتاب زیبایی دانایی بر جهان وارد مرحله ای دیگر میشود و جهانی بس انسانی و زیبا را خود میآفریند....&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;/SPAN&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;آری کنون لحظه لحظات پل صرات و گذر از نابهنجاری ها است و این لحظه ی انتخاب و فارق التحصیلی خداوندگار دادار دادگر در این آزمایشگاه آدم است و هر گام میرمالک پنهان انتخاب و تحصیلی است برای فرمانی دیگر. در عالم هرچه هست جریان یک واحده ی وجود در اشکال موجود است و عالم عالم یکتایی است.&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;چنین فرموده شد که : در ابتدا کلمه بود، کلمه نزد خدا بود و خدا کلمه بود.... . پس به دنبال معجزات در عالم معنا و کلام بگردید که آن نجات بخش و دانا کننده ی بشر است و آنان که در شکل ابرها و نعره ی حیوانات و ... &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;به دنبال نشانه های خدا میگردند !! همانا هیچ درک و قربی به او ندارند و در عالم گمراهان و خرافه بافان &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;سرگردانند.&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;مگر نگفتند که معجزه ی اسلام قرآن است ؟ پس امروز چگونه است که مردم ما از هر امام زاده و منبر و مسجد طلب معجزه دارند ؟ آیا به این نمی اندیشند که آن سیاستمدارانی که دست خود را بر سر ایشان به علامت تبرک میکشند هدفی جز به بردگی کشیدن آنها ندارند ؟ آیا پذیرش تقدس آنان که نفرت اندیشه ی شان عالمی را پر کرده است برای ملت ما آسانتر است از به درک اندیشه ی پیر زمان یارومه راهبر جان ابراهیم زمان ابراهیم میرزائی نشستن ؟!!!! &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;آیا مردم ما با اینچنین اعتقاداتی نام خود را مسلمان مینهند ؟ !!! آیا اسلام سیاسی در جهان ما چیزی جز ابزار فریب و به نادانی کشاندن مردم و استثمار و استعمار آنان است ؟؟ بلی این اعتقادات، اعتقاداتی فاقد اندیشه و سیاسی است و هدفی شیطانی در جهت به زیر بردگی کشیدن آدمیان دارند. به امید بیداری و به اندیشه نشستن همه ی آدمیان تا به روز درک معنای خدا و حضور بی واسطه ی همگان در عالم معنا و گذر از صورت ها و بطلان فرمان روایان سرزمین نفرتها... .&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;امید که اگر کوتاهی و جهالتی در اندیشه ام میبینید مرا دستگیر شوید و راهنما....&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;همانا فرمود که از رگ گردن به ما نزدیکتر است، او در میان ماست، پس می آن بنوشیم و مست حضورش شویم، میم صورت هستی ماست و الله در میان ما و الف لام و میم میشود یعنی پنهان در صورت میم میشود و لام و میم دو میمی است که لا یا میان آن الف یا همان آغاز کلام و خداوندگار هستی بخش است و حی و حاضر در وجود و واجب الوجود ماست. همانا او ذات همه چیز است، او نور دانایی است و دیدن از اوست و خود قابل دیدن نیست (( لن ترانی الغیب لله هی حی الحضور واجب الوجود سرمدی سرالنور و المصور کلام الله ... )) &lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 10pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;(نقل از الکتاب توحید صفحه ی اول، نوشته ی م الله میم &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;).&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;بیایید به فتح این معنا از مستی آن می میان مستانه فریاد برآوریم م الله لااله الا الله م الله میم م الله..... .&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN dir=ltr style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;آری ما مست این حضور و دل خسته از فراق یار مستانه فریاد بر می آوریم م الله، و به آنان که خود را دایه ی دلسوزتر از مادر ادیان میدانند و ملایان شیطان و آنان که در درک اندیشه ی ادیان باز نشده اند، تنها یک گفتار داریم و آن این است : (( گر می نخوری ، طعنه مزن مستان را – بنیاد مکن تو حیله و دستان را . تو غره بدان مشو که می مینخوری – صد لقمه خوری که می غلام است آن را )).&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;پا و سر و بال سیمرغ دانایان با شمشیر دانایی قطع گشته است و تنها دل برای آن سیمرغ مانده است، شناخت خدا با دل میسر است به همین کلام او دل ستان است دل ستان آنی است که سیمرغ طریقتش را بی پا و دست و سر دید و نام طریقتش را پاسربال نهاد و سیمرغ را نشان آن نهاد. او یگانه سیمرغ قله ی قاف وجود و ما هنوز اندر خم یک کوچه ایم ....... خود آ – به خود آ – به خدایی خدا.... خود آ آآآآآآآآآآآآآآآآ توآآآآآآآآآآآآآآآآآ.... .&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;همانا خداوند میخواهد که باطل با دست آدم منهدم شود و با دست آدم حق و عدالت در زمین برقرار گردد چرا که آدم دست خداست و در آن وحدت &lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt; &lt;/SPAN&gt;وجود، ید الله فوق ایدیهم خواهد بود پس به تطهیر و تکامل وجود رویم و به خود آییم تا خدا و ید الله گردیم و خادم بر خلقت و آدمیان.&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt; بار هستی را بر دوش کشیم نه اینکه باری گردیم بر آن.&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;سوشیانت یا امام زمان در فرهنگ جاودانه ی ایران زمین نهیب به بدیها و یاد آور روز جزاست&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;هر آدم نگاهبان آفرینش به سپندار آتش وجود، و هر آدم زاویه ی خود با خدا دارد&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;کمال جسمانی گیرید، کمال جسمانی را به کمال عقلانی برید، آتش الله ی گیرید &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;این حکم خداست&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;حکم حق، فرمان احقاق حقوق از ناحق است&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;حق، حق را فرمان میدارد&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;و حاضر مشود تا ناحق آشکار گردد&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;یاحق&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;انالحق&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT size=3&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;هو الحق&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;الراهبر&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;الهادی&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;الحفیظ&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000 size=3&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;م الله لا اله الا الله م الله میم م الله&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;م الله سر توحید&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN dir=ltr style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;م الله لبیک&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;لا شریک لک لبیک&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;م الله لبیک&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;م الله میم م الله&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 20pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;کونگ فو اسرار راهبری است و رهبر یکتا است&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 16pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt&quot; align=left&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;نوشته ی : نوشتار هستی، کوچکترین همراه طریقت دانایان شهاب ابراهیمی&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt&quot;&gt;&lt;SPAN style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt&quot;&gt;&lt;SPAN style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=FA dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;دعوت ما از همه ی مردم درک این گفتار و به اندیشه بردن آن است، همراهان با دل در راه دانایی باشید در راه دلستان طریقت دانایان، و تنها با او به پیمان باشید که چاه و چاله در راه دانایی بسیار کنده اند. تنها به قوت دانایی&lt;SPAN style=&quot;mso-spacerun: yes&quot;&gt;  &lt;/SPAN&gt;و دل ایمان داشته باشید. به امید شنیدن فریاد برحق انسانها و احقاق حقوق آدمیان&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;&lt;SPAN style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;
&lt;HR&gt;
&lt;/FONT&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P class=MsoNormal style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; mso-bidi-language: FA&quot;&gt;&lt;o:p&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;كلام بر انسان حكم شد&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;حكم ميم الله است حكم جريان است&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;راه دشوار انديشه پنهان&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;نمود قدرت است بنيان آدم&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;توپك زمين&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;جايگاه روان است&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;جمع جامع ابلهان است&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;ايمان است&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;ايمان انسانها را حكم شد به برپايى جانگاهها از انديشه هاى نوين&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;پس  متو نشان آنست&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;م الله ميم&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; TEXT-ALIGN: center&quot; align=center&gt;&lt;SPAN dir=rtl&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ dir=rtl style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;SPAN dir=rtl&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN dir=rtl&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;SPAN dir=rtl&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot; color=#ff0000&gt;كلاممان فرمان است بر انسانها. حكم به برپايى انقلاب است. راه سخت و پر از سختيها، اما روز نماياندن قدرت انديشه ی انسانسازيست. سياره زمين دانشكده ی برپادارى روان انسانهاست. جامعه رو به سرازيريست، ايمان داشتن به فرمان ميم ا لله است، پس ايمان داشته باشيد به راه و در معابد انديشه هاى نو را انشاء نماييد و حكم آخر اتحاد است كه نشان  آن متوی تن و روان ا ست.&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: justify&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;SPAN lang=AR-IQ style=&quot;FONT-SIZE: 13.5pt; COLOR: black; mso-bidi-language: AR-IQ; mso-ascii-font-family: Ali_K_Alwand; mso-hansi-font-family: Ali_K_Alwand&quot;&gt;&lt;FONT face=&quot;Times New Roman&quot;&gt;&lt;/P&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;
&lt;HR&gt;
&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/SPAN&gt;</description>
<pubDate>Thu, 12 Jun 2008 17:01:18 GMT</pubDate>
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